Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !

Transcript दर्द और खुशी जब अंगड़ाई लेते हैं तो चिटकती है रात पूरी कायनात और तमाम चेहरे अपने से उड़ते हैं जुगनुओं की तरह लेकिन नज़र आसमान में चांद को … Continue reading Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !

Satellite : चांद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं

This Poem explores Moon as a communication satellite between Human Bodies, Human Souls and Human thoughts. दर्द और खुशी जब अंगड़ाई लेते हैं तो चिटकती है रात पूरी कायनात और … Continue reading Satellite : चांद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं