DROPS : बूँदें

आसमान में रहने वाली बूँदों से लेकर आँखों में रहने वाली बूँदों तक.. सबको इस एक पोस्ट में लयबद्ध किया है.. इन पंक्तियों की बारिश में आप थोड़ी देर भीग सकते हैं..

Havelis of Old Delhi : सपने देखने वाली पुरानी हवेलियां

“कभी आओ हवेली पे” कई फिल्मों में ये डायलॉग आपने सुना होगा, ये शब्द खलनायक के मुंह से निकलते थे, और मकसद भी पवित्र नहीं होता था। लेकिन इस कविता … Continue reading Havelis of Old Delhi : सपने देखने वाली पुरानी हवेलियां

Veil of Monsoon : बूँदों का पर्दा

इतने सारे मौसमों में उसे बरसात का मौसम पसंद है जब जब बारिश होती है उसके आंसू छिप जाते हैं वैसे बरसात में बहुत कुछ छिप जाता है कई स्याह … Continue reading Veil of Monsoon : बूँदों का पर्दा

Soil-mates : किस मिट्टी के बने हो ?

बातचीत के दौरान अक्सर कहा जाता है – किस मिट्टी के बने हो.. इसका जवाब हर किसी के लिए अलग अलग हो सकता है.. फिर भी एक धागा है.. जो … Continue reading Soil-mates : किस मिट्टी के बने हो ?

प्रश्नPoetry 2 : Resonance | जीवन की धुनों का समारोह

मेरे आगे नाचती हुई वसंत की हवा, बालकनी पर लोहे की छड़ों को पकड़कर  झूला झूलती बारिश की बूंदें,  पीछे रवि शंकर का सितार वादन, और कहीं दूर से आती … Continue reading प्रश्नPoetry 2 : Resonance | जीवन की धुनों का समारोह

Atmosphere.. हवाओं में पिघलते जाना

Finally my new poem is cooked…  it is… served with love. Hindi and English versions verse by verse जलते जाना, जलते जाना हवाओं में पिघलते जाना तमाम उखड़ती सांसों पर … Continue reading Atmosphere.. हवाओं में पिघलते जाना