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प्रश्नPoetry 9 – तीव्र ज्वर, एक आत्मसंवाद

Core Thought : Sometimes high fever dismantles you into pieces and then starts a conversation between you and your body. तीव्र ज्वर काया को जिजीविषा से, पूर्वाग्रहों से, अहंकार और आत्मप्रदर्शन … Continue reading प्रश्नPoetry 9 – तीव्र ज्वर, एक आत्मसंवाद

प्रश्नPoetry 8 – सपने में तैरती सत्य की लाश

Another installment of प्रश्नPoetry (Question Poetry). This one talks about ironical fusion of dream and truth. कोई सपना अपना सा टूट जाए तो आज की सच्चाई को आँखे खोलकर डुबो … Continue reading प्रश्नPoetry 8 – सपने में तैरती सत्य की लाश

प्रश्नPoetry 5 : Relationships Die ?

दुनिया से जाता हुआ आदमी कई सीढ़ियां छोड़ जाता है और कई ज़ंग खाए पुल भी न जाने कैसे नए रास्ते बन जाते हैं टूटे और छूटे हुए रिश्तों के … Continue reading प्रश्नPoetry 5 : Relationships Die ?

प्रश्नPoetry 4 : Clocks are Locks ?

घड़ी की सुई को पकड़कर लटके हुए लोग एक गोलाकार रास्ते पर चलते हुए जीवन जीते रहते हैं जो घड़ी की रफ़्तार है वही इन लोगों की रफ़्तार है जो … Continue reading प्रश्नPoetry 4 : Clocks are Locks ?

प्रश्नPoetry 3 : Dry Days | सूखा हुआ सा कुछ

  ठंडे पानी में, साबुन के बेईमान झाग में, उबलते हुए तेल के धुएँ में, उसके हाथों की सतह सिकुड़ने लगी थी फिर नये फूल-पत्तों का मौसम आया लेकिन उसके … Continue reading प्रश्नPoetry 3 : Dry Days | सूखा हुआ सा कुछ

प्रश्नPoetry 2 : Resonance | जीवन की धुनों का समारोह

मेरे आगे नाचती हुई वसंत की हवा, बालकनी पर लोहे की छड़ों को पकड़कर  झूला झूलती बारिश की बूंदें,  पीछे रवि शंकर का सितार वादन, और कहीं दूर से आती … Continue reading प्रश्नPoetry 2 : Resonance | जीवन की धुनों का समारोह

प्रश्नPoetry 1 : ख़्वाबों का सिर छत से टकराने लगा

Series of Prose.. each one ends with a question.   नज़र ऊंची पैर को उचककर देखने की आदत आजकल मेरे ख़्वाबों का सिर.. छत से टकराने लगा है क्या छतों … Continue reading प्रश्नPoetry 1 : ख़्वाबों का सिर छत से टकराने लगा