02 (Oxygen) : अपनेपन की प्राणवायु

किसी अपने को एक एक सांस के लिए तरसते देखकर… सारे कीर्तिमान… लड़ाई-झगड़े… व्यर्थ नज़र आते हैं… इस वक्त मृत्यु का बोध.. ये बता रहा है.. कि आसपास हर ज़िंदा कृति को.. अपनेपन की ऑक्सीजन की ज़रूरत है.. उन्हें ये ऑक्सीजन देते चलिए…

Universe in a Post❤️Card : पोस्टकार्ड में ब्रह्मांड

प्रेम में एकांत का अनंत विस्तार होता है… दो प्रेमियों की दूरी मैंने एक पोस्टकार्ड में नापी है!

ख़ुद को एक फूल दिया है

75 सेकेंड्स के इस वीडियो में फूलों की कई पंखुरियों के साथ उम्मीद भी मौजूद है.. वही उम्मीद जो कुछ भी नया शुरू करते हुए हमारे अंदर होती है

बेदाग़ बड़े.. और सच्चे बच्चे

जो धूल.. कीचड़ में सने हैं.. प्रेम और एसिड से जले हैं.. जिन पर जीवन के निशान पड़े हैं.. जो दौड़ते भागते बच्चे हैं.. वही लगते सच्चे हैं

Interspace : दूरी

इस कविता का जो केंद्रीय पात्र है.. वो आपकी ही तरह तैरता है हर रोज़, समय के सागर में… जहां ऊँची, तूफ़ानी लहरें आती हैं.. वहां घड़ी की सुइयों के … Continue reading Interspace : दूरी

Digestive System : पाचन शक्ति

इस विचार को मन के मर्तबान में डाला.. धूप में रख दिया.. फिर जो बना.. वो ये रहा.. थर्मोकोल, कांच, लकड़ी, मिट्टीअन्याय, हिक़ारत, ठंडा लहू , खौलते हुए तानेसब पचा … Continue reading Digestive System : पाचन शक्ति

Point : बिंदु

जो लोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हैं.. वो दिन भर इंसान के भाग्य पर आश्चर्य करते होंगे कि रहने के लिए ऐसा.. नीले कंचे जैसा.. ग्रह मिला है.. और उन्हें इस बात पर भी हैरानी होती होगी कि कोई खुद को कितना भी बड़ा समझे.. है तो वो एक बिंदु ही… बल्कि ये पूरा ग्रह ही एक बिंदु है.. सौरमंडल, आकाशगंगा और ब्रह्माण्ड के विस्तार में।

Effort : प्रयास

हर प्रयास की एक उम्र होती है.. फिर उसकी प्रासंगिकता खोई हुई सी लगती है.. सच ये है कि सारे प्रयास हमेशा जीवित नहीं रह सकते.. उन्हें काल खंड की कँटीली तारों को पार करने की इजाज़त नहीं होती.. प्रयासों को अमरत्व का वरदान नहीं होता… अगर सारे प्रयास.. सदा के लिए जीवित रहने लगें.. तो शायद उनकी हैसियत खत्म हो जाएगी.. हालाँकि हमारे यहां कहते हैं कि कोई प्रयास बेकार नहीं जाता… इसलिए आपकी हर कोशिश की ख़ुशबू आ जाती है और दूर खड़ा कोई अनजान व्यक्ति भी आपको पहचान लेता है… प्रयास की नदी.. पहचान वाले समुद्र में ही मिलती है

A Bridge called Father : पुल हैं पिता

एक पुल है…… जो धीरे धीरे बना है…. कई वर्षों में…. कई हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर… अनुभव और वात्सल्य के कई ट्रक… गुजर कर उस पर से… आते हैं मुझ तक

Experience of a Sample Human 🦠 : सैंपल मनुष्य का अनुभव

कई बार लगता है कि अनुभव एक व्यक्ति से दूसरे में किसी जीवाणु की तरह यात्रा करता है.. और इस क्रम में कुछ इंसान.. दूसरे इंसानों के लिए एक सैंपल … Continue reading Experience of a Sample Human 🦠 : सैंपल मनुष्य का अनुभव

Wireless एकांत में हम-तुम कैसे है ?

आपदा, महामारी, संक्रमण के असर.. अजीब होते हैं.. जैसे कोई व्यंजन बन रहा हो.. और उसे बनाने की रेसिपी में लिखा हो… “समाज के छिलके-कूड़ा-करकट माने जाने वाले गरीब-भूखे-मजबूर-बेरोज़गार पहले … Continue reading Wireless एकांत में हम-तुम कैसे है ?

Cage 🦠 : पिंजरा

जैसे किसी बच्चे ने शरारत में एक लकीर खींच दीऔर अगले ही पलसबके आलीशान घरपिंजरे बन गए अब घरों में चिंताओं का, टकराती हुई आदतों का, बोरियत का ट्रैफ़िक जाम है..और सड़कों पर … Continue reading Cage 🦠 : पिंजरा

Masks 🦠 : मुखौटे

अंदर तो हमेशा ही पहनकर रखते थे ये मुखौटे अब बाहर आ गये हैं अपनी पहचान ढूँढते घूम रहे लोगों में आजकल मुँह ढकने की होड़ है अब सब एक … Continue reading Masks 🦠 : मुखौटे

Moon Line in Lockdown : चांद की आज़ाद लकीर

Tap or Click Play चाँद किसी लॉकडाउन में नहीं हैवो उम्मीदों वाले विभाग का आपातकालीन सेवक हैहर आँख..चाँद को देखते हुएआसमान में आज़ादी की लकीर खींच रही है

अपनी ही विरासत में पिता का आना देखा.. गाना देखा

मेरे पिता अब सत्तर वर्ष के हो रहे हैं.. लेकिन उनका कंठ आधी उम्र का है.. सबूत माँगना फ़ैशन में है.. तो इस बात का सबूत वीडियो के रूप में … Continue reading अपनी ही विरासत में पिता का आना देखा.. गाना देखा

A Singing Planet : गाता हुआ ग्रह

पंडित जसराज के नाम पर सितंबर 2019 में नासा ने एक ग्रह का नामकरण किया था। ये सम्मान पाने वाले वो पहले भारतीय संगीतज्ञ हैं। उनसे पहले मोत्सार्ट और बीथोवन … Continue reading A Singing Planet : गाता हुआ ग्रह

selective focus photo of yellow sunflower

Sunflowers : सौर किरणों के शक्ति पुष्प

रविवार को सूर्य से ऐसी किरणें निकलती हैं जो आपको आलसी…बहुत आलसी बना देती हैं। ये वैज्ञानिक तथ्य नहीं है, ये रविवार को सूर्य और छुट्टी का दिन मानने के फलस्वरूप उपजा अनुभव है।
ये सूर्य की सुनहरी लकीरों का गणित है
जिसे सिर्फ मैं और तुम समझते हैं

i-Transform : संज्ञा से क्रिया तक

ये दौर संज्ञाओं का है.. जिन्हें जड़ होने के बावजूद विशालता का प्रतिरूप मान लिया गया है.. जबकि क्रिया को नौकर-चाकर के भाव से देखा जाता है.. जब कोई पैदा होता है तो नामकरण के साथ वो संज्ञा तो हो ही जाता है.. लेकिन विशुद्ध क्रिया होना.. जीवन के गूढ़ अर्थों का मान रखना है

Crunchy Democracy : कुरकुरा लोकतंत्र

राजपुरुष(या स्त्री)… फिर चाहे वे किसी भी सत्ता में क्यों न हों.. उन्हें लोकतंत्र को चबाने में बड़ा स्वाद आता है… घर.. दफ़्तर.. देश… दुनिया… हर जगह यही समीकरण है

The Hum-सफ़र Project |👫| तुम्हारे साम्राज्य में मेरी आराम कुर्सी

उसने कहा – क्या अब भी तुम्हें मेरे ख़्वाब आते हैं ?   उसके हमसफ़र ने कहा – तुम वही हो जो मेरे ज़ेहन की अंगुली पकड़ के मुझे ख़्वाबों … Continue reading The Hum-सफ़र Project |👫| तुम्हारे साम्राज्य में मेरी आराम कुर्सी

Cold Blooded Species : ठंडे खून वाली प्रजातियां !

ये चार कविताओं का एक फोल्डर है ‘Master’-Key : चाबी व्यवस्था के पास है Road Roller : सावधान, आदमी काम पर हैं Spine : रीढ़ की हड्डी Questions : प्रश्न … Continue reading Cold Blooded Species : ठंडे खून वाली प्रजातियां !

विष-अमृत : Poison Defeated !

ये Poison की पराजय का उद्घोष है संसार में विष घोलने वालों को मेरी तरफ से ढेर सारा अमृत, बचपन में हम विष अमृत बहुत खेलते थे। तब विष को … Continue reading विष-अमृत : Poison Defeated !

मेरे दोस्त, मेरा अंधेरा पी गये : 7 Dimensions of Friendship

मुठ्ठी खोलते ही दोस्ती की सल्तनत शुरू हो जाती है। दोस्ती में अदृश्य सिहरन है, उपासना है, रोशनी की लकीर है, किसी का बोझ उठाने वाली ताकत है, राज़ को रखने वाली तिजोरी है, और वो अंधेरा भी जिसमें सारी महत्वाकांक्षाएं, स्वार्थ और आत्मा पर चिपके कालिख के कण धुल जाते हैं…….

boat paper

वानप्रस्थ में स्वप्न

हर स्वप्न ज़ंजीरों में बँधा है, हर उड़ान क़र्ज़ के पाश में है दबाव ऐसा है कि हर सम्राट वानप्रस्थ की तलाश में है * वैसे ये भी एक कटाक्ष … Continue reading वानप्रस्थ में स्वप्न

Adam eve and apple of politics illustration

Adam-Eve & Apple of Politics : आदम-हव्वा और सियासत का सेब

Eyes burning with Hunger & Lust, Not seeing anyone, Not sparing anyone. Just want to take a bite of that luscious Apple, At any cost. It’s about Eve and Adam, Me and … Continue reading Adam-Eve & Apple of Politics : आदम-हव्वा और सियासत का सेब

Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !

हर चेहरे में वक़्त के ताबूत दफ़्न होते हैं। अंग्रेज़ी में कहूँ तो – Your Face Buries, Coffins of Time ! इस विचार से एक रेखाचित्र और दो कविताओं की … Continue reading Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !

Siddharth with parents in 1983-84

पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood

जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे बचपन से दूरी बढ़ती जाती है, और बचपन जैसी आज़ादी की ख़्वाहिश भी। पिता बनने का सौभाग्य किसी को तभी मिलता है जब … Continue reading पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood

Sandpaper Faces 🎭 रेगमाल जैसे चेहरे

व्यवस्थापकों, पालनकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों के चेहरों को ध्यान से देखिए, आपको वो चेहरे समतल नहीं खुरदरे दिखाई देंगे, और इसके पीछे एक सरल और गहरी वजह दिखाई देती है।

Sorrows of Strangers : पराये दुख भी शक्ति देते हैं

Core Thought / मूल विचार – Harnessing Energy from sorrows.. यानी अपने और पराये दुखों को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करके अपने लिए ऊर्जा बनाना। ये दो कविताएं और … Continue reading Sorrows of Strangers : पराये दुख भी शक्ति देते हैं

What if Buddha wears 🎧 Headphones ? ⏯ अगर बुद्ध हेडफ़ोन पहन लें तो क्या होगा ?

इसका एक ही जवाब है – घर और दुनिया का बोध हो जाएगा। राजकुमार सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु में ही अदृश्य हेडफ़ोन पहन लिए थे, और फिर उन्होंने हर ग़ैर-ज़रूरी और … Continue reading What if Buddha wears 🎧 Headphones ? ⏯ अगर बुद्ध हेडफ़ोन पहन लें तो क्या होगा ?

All the World is a Garage : मरम्मत तसल्लीबख़्श

नफ़रत के स्पार्क प्लग लगाकर घूम रहे लोग ये भूल गये हैं कि पूरी दुनिया एक गैराज है और हम सब उसमें अपनी सर्विस करवाने आए हैं © Siddharth Tripathi … Continue reading All the World is a Garage : मरम्मत तसल्लीबख़्श

1 गुणा 3 : कामवाली की भावनाओं का गणित

एक बार नहीं तीन बार !! अगर आपसे कोई ये कहे कि आपको एक ही काम, एक ही विधि और एक जैसी भावना से, हर रोज़ कम से कम तीन … Continue reading 1 गुणा 3 : कामवाली की भावनाओं का गणित

19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा

आसमान ने हीरे की अंगूठी पहनी है दिलों की बर्फ़ पिघल रही है जमी हुई चेतना पंख फड़फड़ा रही है हर कोई ठंडे घरों से बाहर निकलना या झाँकना चाहता … Continue reading 19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा