Moon Line in Lockdown : चांद की आज़ाद लकीर

Tap or Click Play चाँद किसी लॉकडाउन में नहीं हैवो उम्मीदों वाले विभाग का आपातकालीन सेवक हैहर आँख..चाँद को देखते हुएआसमान में आज़ादी की लकीर खींच रही है

Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !

Transcript दर्द और खुशी जब अंगड़ाई लेते हैं तो चिटकती है रात पूरी कायनात और तमाम चेहरे अपने से उड़ते हैं जुगनुओं की तरह लेकिन नज़र आसमान में चांद को … Continue reading Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !

Satellite : चांद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं

This Poem explores Moon as a communication satellite between Human Bodies, Human Souls and Human thoughts. दर्द और खुशी जब अंगड़ाई लेते हैं तो चिटकती है रात पूरी कायनात और … Continue reading Satellite : चांद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं

Poetic meaning of Eid <140

जब नफ़रतों के, भ्रम के बादल छँट जाएँ आँख की धूल हट जाए और चाँद साफ़ दिखने लगे तो समझो उसी दिन ईद है EID Mubarak 🕋🌙 © Siddharth Tripathi … Continue reading Poetic meaning of Eid <140

Mutual Fund

कुछ तुझमें अटका है कुछ मुझमें बाक़ी है हमारा आधा आधा सूरज हमारा आधा आधा चांद जोड़कर सब लगा देते हैं ये Mutual Fund है थोड़ी आग जलाओ बहुत ठंड … Continue reading Mutual Fund