Havelis of Old Delhi : सपने देखने वाली पुरानी हवेलियां

“कभी आओ हवेली पे” कई फिल्मों में ये डायलॉग आपने सुना होगा, ये शब्द खलनायक के मुंह से निकलते थे, और मकसद भी पवित्र नहीं होता था। लेकिन इस कविता … Continue reading Havelis of Old Delhi : सपने देखने वाली पुरानी हवेलियां

Rock Song : चूर चूर अभिमान

आपने किसी ढाबे में या घर में.. चूर-चूर नान या रोटियाँ तो ख़ूब खाई होंगी.. लेकिन क्या कभी अपने अंदर मौजूद अभिमान को चूर-चूर करने की कोशिश की है ? … Continue reading Rock Song : चूर चूर अभिमान

SidTreenium : Self Portrait of an Element

सेल्फ पोर्ट्रेट यानी अपना शब्द चित्र बनाने की कोशिश की है। बहुत समय पहले, मूलत: अंग्रेज़ी में लिखी थी। सोचा था अपने जन्मदिन के दिन ही इसे पोस्ट करूंगा.. आज … Continue reading SidTreenium : Self Portrait of an Element

Colors in My Pocket : जेब में गुलाल

This Poem is a Colorful shortcut, towards life मैं एक मुठ्ठी गुलाल हमेशा जेब में रखता हूं अगर कभी मिले कोई सूखा कोना ज़िंदगी का कोई बुझा चेहरा या कोई … Continue reading Colors in My Pocket : जेब में गुलाल

A Woman needs Acid : पैरों पर तेज़ाब डालने वाली औरतें

Tears are chains for women & they need to dissolve these chains with the acid of their confidence. This is about fearless fabric of a woman’s character. This is what … Continue reading A Woman needs Acid : पैरों पर तेज़ाब डालने वाली औरतें

clean clear cold drink

विद्रोही Water 💧

एक गिलास पानी में विद्रोह भी है और ठहराव भी, पानी किसी बैरिकेड से नहीं रुकता, पानी की सत्ता विस्तार में फैली हुई होती है, पानी कभी पदों, जागीरों, साम्राज्यों … Continue reading विद्रोही Water 💧

Space between Me & You : एकांत में ब्रह्माण्ड है

Core thought : This poem tries to capture the cosmic distance between individuals in a relationship. When there is a distance between two persons and they are not clinging to … Continue reading Space between Me & You : एकांत में ब्रह्माण्ड है

गंगा ने पाप धोना बंद कर दिया है !

Environmental Poetry : कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा (या किसी भी नदी) की पूजा और आरती का महत्व है… ये एक बार फिर पाप धोने और पुण्य कमाने का … Continue reading गंगा ने पाप धोना बंद कर दिया है !

Diwali | इस बार दीवाली गीली नहीं है

Happy Diwali to all of you. I wrote this poem in 2015 and even today I feel like sharing it. This Hindi Poem Sketches essence of the festival of Diwali. दीयों … Continue reading Diwali | इस बार दीवाली गीली नहीं है

Last Rites : अंतिम संस्कार

Core Thought / मूल विचार : क्या हमने रिश्ते कमाए हैं ? ये सवाल ही इस रचना का मूल तत्व है, हम सब जिस तरह चालाकी से, रिश्तों को भौतिक … Continue reading Last Rites : अंतिम संस्कार