• Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !
    Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !

    हर चेहरे में वक़्त के ताबूत दफ़्न होते हैं। अंग्रेज़ी में कहूँ तो – Your Face Buries, Coffins of Time ! इस विचार से एक रेखाचित्र और दो कविताओं की रचना हुई। पहले रेखाचित्र देखिए। इसमें आपको एक चेहरे की बनावट और उसमें अंगूठे के निशान जैसी आकृति दिखाई देगी। रेखाचित्र ये कहता है कि […]

  • पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood
    पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood

    जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे बचपन से दूरी बढ़ती जाती है, और बचपन जैसी आज़ादी की ख़्वाहिश भी। पिता बनने का सौभाग्य किसी को तभी मिलता है जब वो बचपन से एक निश्चित दूरी बना चुका होता है। ऐसे में Father’s Day के दिन किसी भी पिता को कुछ शब्दों की मदद से […]

  • Pixels : अपनी तस्वीर के टुकड़े
    Pixels : अपनी तस्वीर के टुकड़े

    अंत में आपकी शख़्सियत में बस एक मुस्कान ही बाक़ी रह जाती है

  • Sandpaper Faces 🎭 रेगमाल जैसे चेहरे
    Sandpaper Faces 🎭 रेगमाल जैसे चेहरे

    व्यवस्थापकों, पालनकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों के चेहरों को ध्यान से देखिए, आपको वो चेहरे समतल नहीं खुरदरे दिखाई देंगे, और इसके पीछे एक सरल और गहरी वजह दिखाई देती है।

  • Sorrows of Strangers : पराये दुख भी शक्ति देते हैं
    Sorrows of Strangers : पराये दुख भी शक्ति देते हैं

    Core Thought / मूल विचार – Harnessing Energy from sorrows.. यानी अपने और पराये दुखों को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करके अपने लिए ऊर्जा बनाना। ये दो कविताएं और उनका उपसंहार किसी बहुमंज़िला इमारत की ऐसी Balconies की तरह है जिनसे दिखने वाला दृश्य किसी एक बिंदु पर मिलता है। ऐसी कोशिश मैंने पहले […]

  • What if Buddha wears 🎧 Headphones ? ⏯ अगर बुद्ध हेडफ़ोन पहन लें तो क्या होगा ?
    What if Buddha wears 🎧 Headphones ? ⏯ अगर बुद्ध हेडफ़ोन पहन लें तो क्या होगा ?

    इसका एक ही जवाब है – घर और दुनिया का बोध हो जाएगा। राजकुमार सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु में ही अदृश्य हेडफ़ोन पहन लिए थे, और फिर उन्होंने हर ग़ैर-ज़रूरी और पेचीदा चीज़ों/भावनाओं को सहज और सरल बना दिया। मुसीबत उन्हें म्यूज़िक सी लगने लगी। जिन अदृश्य हेडफोन्स की मैं बात कर रहा हूँ, उन्हें आप […]

  • Angry vs Hanuman : ‘उग्र-हनुमान’ वाला दुष्प्रचार !
    Angry vs Hanuman : ‘उग्र-हनुमान’ वाला दुष्प्रचार !

    हमारे ग्रंथों में हनुमान जी को बल-बुद्धि-विद्या-विवेक का प्रतीक माना गया है। लेकिन वो कभी क्रोध के अधीन नहीं होते। वो वानर की तरह हंसते खेलते, सामान्य शरारत करते हुए ही अपने बल का प्रयोग कर लेते हैं। उनका बल प्रयोग भी शत्रु के प्रति हास्य-व्यंग्य और लीलाओं से भरा हुआ है। किसी भी परिस्थिति में वो ये नहीं भूलते कि वो राम के सेवक हैं। और भगवान का सेवक होने का भाव उनमें क्रोध और घमंड नहीं आने देता।

  • Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !
    Satellite : चाँद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं !

    Transcript दर्द और खुशी जब अंगड़ाई लेते हैं तो चिटकती है रात पूरी कायनात और तमाम चेहरे अपने से उड़ते हैं जुगनुओं की तरह लेकिन नज़र आसमान में चांद को ढूंढती है और उससे चिपक जाती है चांद निकलता है तो मैं और तुम जुड़ जाते हैं चंदा तुम्हारा, मेरा, हम सबका है दुनिया के […]

  • ख़ुद को लिखी चिठ्ठियां : Letters soaked in Pain
    ख़ुद को लिखी चिठ्ठियां : Letters soaked in Pain

    This poem is about Letters which we write to ourselves : ideal for weekly soul washing, Sunday = Kavi-Day

  • All the World is a Garage : मरम्मत तसल्लीबख़्श
    All the World is a Garage : मरम्मत तसल्लीबख़्श

    नफ़रत के स्पार्क प्लग लगाकर घूम रहे लोग ये भूल गये हैं कि पूरी दुनिया एक गैराज है और हम सब उसमें अपनी सर्विस करवाने आए हैं © Siddharth Tripathi ✍️ SidTree, Poem & illustration is copyrighted, you are free to use with proper attribution.

  • भगवान शिव = विष पचाने का यूज़र मैनुअल
    भगवान शिव = विष पचाने का यूज़र मैनुअल

    भगवान शिव ध्यान मुद्रा में रहते हैं। शिव ने अपने जीवन में बहुत कुछ खोया और बहुत कुछ पाया..लेकिन महादेव कभी जीवन की ऐसी घटनाओं से विचलित नहीं हुए । शिव की भक्ति में एक ख़ास तरह का अपनापन और स्नेह है, उनकी भक्ति का प्रसाद पाकर संसार शिथिल हो जाता है, परंतु वो संहारकर्ता […]

  • Red Filter : दृश्य का रक्तस्नान
    Red Filter : दृश्य का रक्तस्नान

    जिनके स्वप्न शालीन नहीं है वो उन्हीं की आँखों में टूटे हुए काँच की भाँति चुभते हैं पलक की हर झपक दृश्य को रक्तस्नान करवाती है © Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

  • 1 गुणा 3 : कामवाली की भावनाओं का गणित
    1 गुणा 3 : कामवाली की भावनाओं का गणित

    एक बार नहीं तीन बार !! अगर आपसे कोई ये कहे कि आपको एक ही काम, एक ही विधि और एक जैसी भावना से, हर रोज़ कम से कम तीन बार करना होगा तो आपको कैसा लगेगा? क्या आपके अंदर ऐसा कर सकने की शक्ति है। क्या आप तीनों बार उस कर्म के साथ न्याय […]

  • 19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा
    19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा

    आसमान ने हीरे की अंगूठी पहनी है दिलों की बर्फ़ पिघल रही है जमी हुई चेतना पंख फड़फड़ा रही है हर कोई ठंडे घरों से बाहर निकलना या झाँकना चाहता है सूर्य की इन किरणों में प्रेम की अनुभूति है क्या वाग्देवी सरस्वती ने खुद ये मौसम लिखा है ? ज़रूर उन्होंने ही लिखा होगा, […]

  • “Respected Taps” : नल आ गये हैं
    “Respected Taps” : नल आ गये हैं

    घर में घुसने से पहले ख़राशते हैं गहरी नींद में पड़े इंसानों को खड़ा कर देते हैं, 90 डिग्री के कोण पर स्वागत करो इनका नल आ गये हैं अपाहिज शहरों में नल पूरे आदर के साथ आते हैं © Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

  • कामकाजी कविताएं : Poems from the Workplace
    कामकाजी कविताएं : Poems from the Workplace

    ये कविताएं, कामकाज और नौकरियों से निकली हैं, इसलिए इन्हें कामकाजी कविताओं की संज्ञा दी है। जिस कामकाज की मैं बात कर रहा हूं उसकी भूमिका बचपन से ही बननी शुरू हो जाती है। देश की आधी से ज़्यादा आबादी अपनी ज़िंदगी की शुरुआत में वो पढ़ती है जिसे पढ़ने का कभी मन नहीं करता […]

  • zZZZ 😴 : निद्रा सुख
    zZZZ 😴 : निद्रा सुख

    नींद का सुख हर किसी को नहीं मिलता। दिन में कई बार सोने और जागने के बीच की अवस्था में रहते हैं, हम लोग। इस सोने और जागने के बीच में कमाना, लड़ना, भोगना, मार खाना और छोड़ना.. सब चलता रहता है। हाल ही में एक विकसित देश में हुआ रिसर्च पढ़ रहा था, उसमें […]

  • Myopic World : मोटा चश्मा लगाने वालों का संसार
    Myopic World : मोटा चश्मा लगाने वालों का संसार

    आपको थोड़ी देर के लिए वो नज़र भेंट करता हूँ, जो स्वतः ही कमज़ोर आँख वालों के पास होती है, ये नज़र रेखाएँ मिटा देती है, और दिखाती है – दिन में मिली हुई रात, अमीरी में छिपी ग़रीबी, दुख में मिला हुआ सुख, हैसियत पर कुंडली मारकर बैठे डर…

  • Touch Screen : उँगलियों को सुन्न करने वाला काँच
    Touch Screen : उँगलियों को सुन्न करने वाला काँच

    क्या मैं आपका चेहरा छूकर देख सकती हूँ ? एक नेत्रहीन लड़की को एक मशहूर आदमी से ये सवाल पूछते हुए देखा, और उसी पल मन में आया कि छूकर देखना क्या होता है? क्या छूकर किसी को देखा जा सकता है?जब आँखें नहीं होतीं, तो देखने का काम दूसरे अंगों/इंद्रियों को करना होता है। […]

  • प्रश्न❓Poetry : प्रश्नों को प्रक्षेपित करने वाला एक विचार और 10 कविताएँ
    प्रश्न❓Poetry : प्रश्नों को प्रक्षेपित करने वाला एक विचार और 10 कविताएँ

    प्रश्नों का चरित्र भी अजीब होता है, वो तभी आते हैं जब आप थोड़ा धीमे हो जाते हैं, थोड़ा सा ठहर जाते हैं। इस दौर में ठहराव को मृत्यु के समान माना जाता है। ठहराव से हर कोई डरा-डरा सा लगता है और जीवन में हर वक़्त व्यस्त रहने को ही ईश्वर की कृपा माना […]

  • Snippets of Love : घरेलू प्रेम पत्र (क्रम संख्या – १,२,३,४,५…)

    डाक विभाग बर्फ़ की सिल्ली की तरह जम गया है, नेटवर्क ने हड़ताल कर दी है, वक़्त के इस Offline टुकड़े में कुछ पुराने बिखरे हुए पत्र मिले हैं। सर्द मौसम में मन को तापने के काम आएँगे। आवश्यकता मुझे तुम चाहिए होती हो, पर मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए होता खौलता हुआ पानी दूध […]

  • ‘Mount Garbage’ 🏔 in Recycle Bin 🗑 : कबाड़ का शिखर
    ‘Mount Garbage’ 🏔 in Recycle Bin 🗑 : कबाड़ का शिखर

    मूल विचार और काव्य मानचित्र में दिखाई गई स्थिति का वर्णनजो कुछ नहीं छोड़ सकता वो अंत में कबाड़ के शिखर पर पहुँचता है, आह्लादित (प्रसन्नचित्त) होकर विजय का ध्वज फहराता है, और Right Click करके Empty Recycle Bin का विकल्प चुन लेता है। Click करते ही सब किया धरा नष्ट हो जाता है, अर्थात […]

  • दीया बनो, रोशनी रचो : Worship of Light
    दीया बनो, रोशनी रचो : Worship of Light

    दीवाली पर आपके साथ कुछ रचनाएँ शेयर करना चाहता हूँ, इस पोस्ट में आगे जो वीडियो है वो एक पुरानी रचना पर आधारित है। इस विज़ुअल कविता को 2011 में संपूर्ण रूप से iPad पर ही तैयार किया था। इन रचनाओं को जब आप सिलसिलेवार तरीक़े से पढ़ेंगे तो दीवाली की काव्यात्मक पूजा संपन्न हो […]

  • अंधेरे का उत्सव मनाने वाला योद्धा : Dark Knight
    अंधेरे का उत्सव मनाने वाला योद्धा : Dark Knight

    रोशनी के उत्सव से पहले, मेरे साथ अंधेरे के साम्राज्य में थोड़ी देर के लिए विश्राम कीजिए। हर चीज़ को एक समान कर देने वाला अंधेरा डरावना नहीं है। एक बच्चा जब मां की गोद में आराम से सो जाता है तो उसकी आंखें बंद होती हैं, और उसके चारों ओर अंधेरा ही होता है। […]

  • ख़ामोश मेहनत का फ़लसफ़ा ?
    ख़ामोश मेहनत का फ़लसफ़ा ?

    क्या चुपचाप की गई मेहनत से सफलता की गारंटी मिल सकती है, या ये शोर का दौर है?