• Truth is forever ? 👨🏻‍💻 सच नहीं है सदा के लिए
    Truth is forever ? 👨🏻‍💻 सच नहीं है सदा के लिए

    हम सोचते रहते हैं कि जो सत्य है वो हमेशा हमेशा के लिए है, लेकिन इस दौर में लोग सत्य का स्थान परिवर्तन करवा देते हैं, उसकी दिशा बदल देते हैं… और फिर सुकुमार सा सच, झूठ के साथ चाय पकौड़ी करता नज़र आता है !

  • Happiness Index on Finger : तर्जनी पर प्रसन्नता का सूचकांक
    Happiness Index on Finger : तर्जनी पर प्रसन्नता का सूचकांक

    आसपास जलते हुए पुलों, खरोंच खाती आवाज़ों के बीच… यही सच है… जो मायने रखता है

  • Escalators : स्वचालित सीढ़ियाँ
    Escalators : स्वचालित सीढ़ियाँ

    ‪स्वचालित सीढ़ियाँ सिर्फ एक सुविधा मात्र नहीं हैं… ‬ इनमें श्रम का समर्थन मूल्य तय करने वाला एक सामाजिक कटाक्ष भी दिखाई देता है‬। एक तरफ‬ ‪सीढ़ियाँ हाँफ कर चढ़ने वाले लोग हैं.. ‬ ‪दूसरी तरफ ‬‪पराए श्रम पर स्वचालित यात्राएं करने वाला वर्ग‬ सीढ़ी खुद ब खुद चढ़ रही हो और यात्री हो ठहरा हुआ एक बिंदु पर […]

  • Diwali Preparations : दीवाली की तैयारी
    Diwali Preparations : दीवाली की तैयारी

    ये दीवाली की तैयारी से जुड़े छोटे छोटे काव्यात्मक टुकड़े हैं। उम्मीद है आप इनसे खुद को जोड़ पाएंगे White wash : पुताई हर साल पुताई होती है और छोटी छोटी निशानियाँ किसी रंग के नीचे दफ़्न हो जाती है इस बार दीवाली पर अपने मन की पुताई करवानी है Maid : कामवाली उस कामवाली […]

  • Low Power Mode of Humans : इंसान बिजली से नहीं चलते
    Low Power Mode of Humans : इंसान बिजली से नहीं चलते

    इस दौर में हर इंसान पूरी तरह भरा हुआ है, उसके अंतर्मन में या जीवन में किसी और के लिए कोई जगह नहीं है। पहले लोग टकराते थे तो एक दूसरे में छलक पड़ते थे, लेकिन अब किसी दूसरे को सहने या समाहित करने का माद्दा लगभग ख़त्म हो गया है। आने वाले दौर में, […]

  • दैनिक दशानन, दैनिक विजयादशमी
    दैनिक दशानन, दैनिक विजयादशमी

    अब हर रोज़ नये रावण हैं, नयी विजयादशमी है हर रोज़

  • Cold Blooded Species : ठंडे खून वाली प्रजातियां !
    Cold Blooded Species : ठंडे खून वाली प्रजातियां !

    ये चार कविताओं का एक फोल्डर है ‘Master’-Key : चाबी व्यवस्था के पास है Road Roller : सावधान, आदमी काम पर हैं Spine : रीढ़ की हड्डी Questions : प्रश्न एक लाइन में कहूं तो… रोडरोलर में एक चाबी लगाई गई, और कुचल डाला गया रीढ़ की हड्डी को… ये एक लाइन इन 4 कविताओं […]

  • Gandhi Ji… Smile OK Please: कैसे मुस्कुराएँगे गांधी जी ?
    Gandhi Ji… Smile OK Please: कैसे मुस्कुराएँगे गांधी जी ?

    करेंसी नोट पर गांधी जी हंस रहे हैं.. क्योंकि सबसे ज़्यादा पैसा डिफेंस/हथियारों पर खर्च हो रहा है भाषणों में गांधी जी की अहिंसा ट्रेंड करती है जबकि हुक्मरानों की नीतियां किसी न किसी हिंसा को जन्म देती हैं अहिंसा के पुजारी की जयंती पर लगभग सारे टीवी डिबेट्स के नाम हिंसक हैं / हिंसा से परोक्ष रूप से जुड़े हैं….. read more

  • Peak Zero : शिखर-शून्य
    Peak Zero : शिखर-शून्य

    Peak makes you speak  a Language not so deep Intoxication is what mind seek 
you’ve everything but can you keep ? Fear sees through the keyhole peek like a criminal driving fast in the jeep Zeroes are deep Zeroes are deep

  • Windows of SidTree : खिड़कियाँ (दृश्य – 1)
    Windows of SidTree : खिड़कियाँ (दृश्य – 1)

    नगर वधू ने पूछा – तुम्हारी क्या ख़ासियत है ? और प्रश्न ध्वनि चल पड़ी.. उत्तर की प्रतिध्वनि से मिलने को सिद्धार्थ ने संतुष्टि की मुस्कान और ओस भरी आँखों को उद्दीप्त करके कहा…

  • Mahabharat Diary : महाभारत के नन्हे-मुन्ने विश्लेषण (क्रमांक 1, 2, 3)
    Mahabharat Diary : महाभारत के नन्हे-मुन्ने विश्लेषण (क्रमांक 1, 2, 3)

    शीर्षक पढ़कर ये बात मन में आई होगी कि महाभारत के नन्हे मुन्ने विश्लेषण का अर्थ क्या है ? नन्हे =आकार में छोटे,  मुन्ने =बच्चे के भाव से सिखाने वाले यानी कुल मिलाकर इनमें नीति और व्यवहार से जुड़ी शिक्षाएँ हैं। कुछ प्रसंग लिखे हैं, धीरे धीरे ये सीरीज़ बढ़ती जाएगी। कोेई प्रसंग जोड़ना चाहते हैं […]

  • A Silent Room Burns 🔥 ख़ामोश कमरा जलता है
    A Silent Room Burns 🔥 ख़ामोश कमरा जलता है

    ये कविता 12 साल पुरानी है, इसमें एक ख़ामोश कमरा है, जो किसी किताब की तरह सारे लम्हों को अपने अंदर समेटे हुए है। ये भी कह सकते हैं कि जिस कमरे की मैं बात कर रहा हूं वो एक किताब है, जिसके 6 पन्ने हैं, चार दीवारों को चार पन्नों के बराबर मान लीजिए.. […]

  • Atmosphere : माहौल
    Atmosphere : माहौल

    अक्सर माहौल की बात होती रहती है। माहौल ठीक है / नहीं है / पहले ऐसा नहीं था / अब वो बात नहीं रही / जो चाहते थे वो क्यों नहीं हुआ ?… तर्क और भूख पर आधारित इन अनुभूतियों के बीच हम भूल जाते हैं कि माहौल बनाने की चिंगारी.. हमारे अंदर है। हमारे […]

  • Observatory : गुरु और शिक्षक के बीच का फ़र्क़
    Observatory : गुरु और शिक्षक के बीच का फ़र्क़

    महावीर वाणी में आध्यात्मिक गुरु ओशो ने ये विश्लेषण किया है.. शिक्षक दिवस हो या कोई भी और दिन हो..ये पढ़ने लायक़ है। गुरु की धारणा मौलिक रूप से पूर्वीय है। पूर्वीय ही नहीं, भारतीय है। गुरु जैसा शब्द दुनिया की किसी भाषा में नहीं है। शिक्षक, टीचर, मास्टर ये शब्द हैं: अध्यापक। लेकिन गुरु […]

  • Wound : रोशनदान
    Wound : रोशनदान

    खरोंच लगते ही ख़ून बाहर आता है या रोशनी ? क्या घावों में रोशनदान जैसा भी कुछ होता है? सरल से दिखने वाले इस सवाल का जवाब सूफ़ी शिक्षाओं में छिपा हुआ है। ये तस्वीर मैंने इस बारे में सोचते हुए ही ली.. इसे देखिए, कविता पढ़िए..  और दरवेश टाइप फ़ील कीजिए… और हाँ.. गोल घूमने […]

  • विष-अमृत : Poison Defeated !
    विष-अमृत : Poison Defeated !

    ये Poison की पराजय का उद्घोष है संसार में विष घोलने वालों को मेरी तरफ से ढेर सारा अमृत, बचपन में हम विष अमृत बहुत खेलते थे। तब विष को अमृत बनाने के खेल में सिर्फ दूसरे को छू देना ही काफी होता था। विष को छूकर अमृत कर देने वाला ये जादू मुस्कान बनकर […]

  • घरेलू प्रेम पत्र 💌 Offline Letters from Home
    घरेलू प्रेम पत्र 💌 Offline Letters from Home

    डाक विभाग बर्फ़ की सिल्ली की तरह जम गया है, नेटवर्क ने हड़ताल कर दी है, वक़्त के इस Offline टुकड़े में कुछ पुराने बिखरे हुए पत्र मिले हैं। दुनिया से खुद को काटकर गृहस्थ जीवन जीना भी किसी काव्य से कम नहीं। ये वक़्त के कुछ ऐसे अंश हैं, जो आपको अपने से लगेंगे। 7 नये हैं और 5 पहले के लिखे हुए हैं, कुल मिलाकर 12 हुए

  • मेरे दोस्त, मेरा अंधेरा पी गये : 7 Dimensions of Friendship
    मेरे दोस्त, मेरा अंधेरा पी गये : 7 Dimensions of Friendship

    मुठ्ठी खोलते ही दोस्ती की सल्तनत शुरू हो जाती है। दोस्ती में अदृश्य सिहरन है, उपासना है, रोशनी की लकीर है, किसी का बोझ उठाने वाली ताकत है, राज़ को रखने वाली तिजोरी है, और वो अंधेरा भी जिसमें सारी महत्वाकांक्षाएं, स्वार्थ और आत्मा पर चिपके कालिख के कण धुल जाते हैं…….

  • वानप्रस्थ में स्वप्न
    वानप्रस्थ में स्वप्न

    हर स्वप्न ज़ंजीरों में बँधा है, हर उड़ान क़र्ज़ के पाश में है दबाव ऐसा है कि हर सम्राट वानप्रस्थ की तलाश में है * वैसे ये भी एक कटाक्ष है कि मेरे साथ-साथ कैफ़े कॉफ़ी डे के मालिक का नाम भी सिद्धार्थ है © Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

  • Adam-Eve & Apple of Politics : आदम-हव्वा और सियासत का सेब
    Adam-Eve & Apple of Politics : आदम-हव्वा और सियासत का सेब

    Eyes burning with Hunger & Lust, Not seeing anyone, Not sparing anyone. Just want to take a bite of that luscious Apple, At any cost. It’s about Eve and Adam, Me and You, Blinded by Politics. It’s a World full of Hungry & Lonely Actors. आंख में पानी बचा नहीं साज़-ए-दिल बजता नहीं नाखूनों की नोंक से […]

  • उदयपुर की काव्यात्मक थाली : Poetic Thaali of Udaipur
    उदयपुर की काव्यात्मक थाली : Poetic Thaali of Udaipur

    Lockdown में घर बैठे उदयपुर घूमने का मन हो तो इस पोस्ट में एंट्री मार लीजिए… निर्मल आनंद

  • Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !
    Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !

    हर चेहरे में वक़्त के ताबूत दफ़्न होते हैं। अंग्रेज़ी में कहूँ तो – Your Face Buries, Coffins of Time ! इस विचार से एक रेखाचित्र और दो कविताओं की रचना हुई। पहले रेखाचित्र देखिए। इसमें आपको एक चेहरे की बनावट और उसमें अंगूठे के निशान जैसी आकृति दिखाई देगी। रेखाचित्र ये कहता है कि […]

  • पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood
    पचपन वाला बचपन : Celebrating Fatherhood

    जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे बचपन से दूरी बढ़ती जाती है, और बचपन जैसी आज़ादी की ख़्वाहिश भी। पिता बनने का सौभाग्य किसी को तभी मिलता है जब वो बचपन से एक निश्चित दूरी बना चुका होता है। ऐसे में Father’s Day के दिन किसी भी पिता को कुछ शब्दों की मदद से […]

  • Pixels : अपनी तस्वीर के टुकड़े
    Pixels : अपनी तस्वीर के टुकड़े

    अंत में आपकी शख़्सियत में बस एक मुस्कान ही बाक़ी रह जाती है

  • Sandpaper Faces 🎭 रेगमाल जैसे चेहरे
    Sandpaper Faces 🎭 रेगमाल जैसे चेहरे

    व्यवस्थापकों, पालनकर्ताओं और बदलाव लाने वाले लोगों के चेहरों को ध्यान से देखिए, आपको वो चेहरे समतल नहीं खुरदरे दिखाई देंगे, और इसके पीछे एक सरल और गहरी वजह दिखाई देती है।