• Desert Froze, Time Flows : थोड़ा गुनगुना हो सब कुछ

    Hindi Poem followed by Translation in English for International Readers Taken from bilingual poem collection ‘Poetic Buddha’ by Siddharth अंदर ही अंदर बर्फ सी जमी… भागती, हांफती ज़िंदगी में… कुछ यादें लौ सी जलती हैं थोड़ा गुनगुना हो सब कुछ बस दिल यही चाहता है वो ठहरता है, तो वक़्त गुज़रता है और बर्फ का […]

  • Boiling Ocean of Mumbai City…. उबलता समंदर
    Boiling Ocean of Mumbai City…. उबलता समंदर

    Taken from bilingual poem collection ‘Poetic Buddha’ by Siddharth Poem in Hindi जब दो जोड़ा आंखें.. सपने बुन रही थीं.. समंदर चुप था ‘चिल्लर’ की भूख, मवाली का दबदबा दारू की मस्ती रिश्वतखोर ख़ाकी बेईमान टोपी सब देखता था समंदर पर चुप रहता था लेकिन बीती रात समंदर ने सुनी एक शहर की ख़ामोशी देखी […]

  • Dreams can grow on Concrete, Just Believe…
    Dreams can grow on Concrete, Just Believe…

    One Evening when Kavi on iPad (poet next door) was walking down on streets of New delhi, he saw a small crack on side of a road and a yellow flower just emerged and started talking… hit the play button Taken from bilingual poem collection ‘Poetic Buddha’ by Siddharth ख्वाब खड़े हो सके इसके लिए […]

  • है ख़बर गर्म… Breaking News

    Taken from bilingual poem collection ‘Poetic Buddha’ by Siddharth झुकी-बुझी भीगी-थकी नज़रें हैं और हैं अंगारों से सवाल जवाब नहीं मिलता तो क्या है वो भूख से बिलखता है कॉपी पर चलाता नहीं फैलाता है हाथ तो क्या है गिरे हुए को उठाने की भटके को आईना दिखाने की फुरसत कहां है ‘बिक’नी हसीना की […]