बधाइयों की बर्फ़बारी.. प्रसन्नता के बिजलीघर

हर साल एक जनवरी आ ही नहीं पाती… क्योंकि इस तारीख़ पर बधाइयों की बर्फ़बारी होती हैकई बार बहुत ख़ुशनुमा … कई बार बर्फ़ सी ठंडी… कई दफ़ा निरर्थक.. और … Continue reading बधाइयों की बर्फ़बारी.. प्रसन्नता के बिजलीघर

Sapped Warrior : योद्धा की थकान ही उसकी मृत्यु है

कोरोना के संकटकाल में हर घर में थकान की पर्वत श्रृंखलाएँ बन गई हैं .. जिन्हें पार करना बहुत मुश्किल लगता है.. हालाँकि ये असंभव नहीं है..
आपको लगता होगा कि आप एक योद्धा हैं और आप थक पाने की स्थिति में नहीं है…

Explorer : खोजी यात्री

क्या किसी शिखर पर घर बन सकता है ?.. थोड़ा सोचा इस पर तो लगा कि अस्तित्व की ऊँची नोक पर खेल का मैदान तो नहीं हो सकता.. उस नोक … Continue reading Explorer : खोजी यात्री

Pluto की तस्वीरें और समय की कसौटी

‪समय के साथ चीज़ें स्पष्ट होती जाती हैं ‬‪ये प्लूटो की तस्वीरें हैं जिनमें 85 साल का अंतर है ‬‪पहली तस्वीर 1930 की है‬‪अंतिम तस्वीर 2015 की है‬‪यही सूत्र जीवन … Continue reading Pluto की तस्वीरें और समय की कसौटी

Moon Line in Lockdown : चांद की आज़ाद लकीर

Tap or Click Play चाँद किसी लॉकडाउन में नहीं हैवो उम्मीदों वाले विभाग का आपातकालीन सेवक हैहर आँख..चाँद को देखते हुएआसमान में आज़ादी की लकीर खींच रही है

Test Positive 🦠 : टेस्ट पॉज़िटिव आया है

इस समय अगर संवेदनाओँ के सैंपल इकट्ठा किए जाएं.. तो लोगों के दिलों की किताबों से कई सूखे फूल निकलेंगे.. छूते ही टूट सकने वाले… अगर किसी को ये एहसास हो जाए कि वो जहाँपनाह नहीं है.. उसकी मर्ज़ी से एक पत्ता भी नहीं हिल सकता.. तो वो एक बार ज़रूर अपना फ़ोन उठाकर किसी अपने का नंबर डायल करेगा..और जब दूसरी तरफ़ से आवाज़ आएगी.. तो देर तक ज़ुबान से कुछ नहीं निकलेगा.. शायद आँखों से निकल आए… कुछ टेस्ट ऐसे होते हैं.. जिनके सैंपल आँखों से लिए जाते हैं।

Half Burnt Notebook : आधी जली हुई नोटबुक

हिंसा में आंसू तो होते हैं.. पर कई बार गहरा कटाक्ष भी होता है.. संताप होता है और क्रूरता का समारोह भी होता है.. हिंसा के तीन दिवसीय आयोजन के … Continue reading Half Burnt Notebook : आधी जली हुई नोटबुक

Chai-चरित्र ☕️ (a Tea-nalysis)… एक चाय हो जाए !

चाय की प्यालियों के बीच वक़्त कैसे उधड़ता है.. चाय के घूँट इंसान को कैसे सहलाते हैं.. आज़ादी दिलाने वाले सवालों से चाय पर मुलाक़ात कैसे होती है ?… जब अंगारे आराम फ़रमाते हैं तो चाय पिलाना कैसे चाटुकारिता और जी हुज़ूरी बन जाता है.. और चाय में एक चम्मच चीनी घोलते हुए.. किस तरह का अध्यात्म दिखाई देता है ? …Read more…

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Wound : रोशनदान

खरोंच लगते ही ख़ून बाहर आता है या रोशनी ? क्या घावों में रोशनदान जैसा भी कुछ होता है? सरल से दिखने वाले इस सवाल का जवाब सूफ़ी शिक्षाओं में छिपा … Continue reading Wound : रोशनदान

offline letters from home

घरेलू प्रेम पत्र 💌 Offline Letters from Home

डाक विभाग बर्फ़ की सिल्ली की तरह जम गया है, नेटवर्क ने हड़ताल कर दी है, वक़्त के इस Offline टुकड़े में कुछ पुराने बिखरे हुए पत्र मिले हैं। दुनिया से खुद को काटकर गृहस्थ जीवन जीना भी किसी काव्य से कम नहीं। ये वक़्त के कुछ ऐसे अंश हैं, जो आपको अपने से लगेंगे। 7 नये हैं और 5 पहले के लिखे हुए हैं, कुल मिलाकर 12 हुए

boat paper

वानप्रस्थ में स्वप्न

हर स्वप्न ज़ंजीरों में बँधा है, हर उड़ान क़र्ज़ के पाश में है दबाव ऐसा है कि हर सम्राट वानप्रस्थ की तलाश में है * वैसे ये भी एक कटाक्ष … Continue reading वानप्रस्थ में स्वप्न