New Age Poetry

बेदाग़ बड़े.. और सच्चे बच्चे

जो धूल.. कीचड़ में सने हैं.. प्रेम और एसिड से जले हैं.. जिन पर जीवन के निशान पड़े हैं.. जो दौड़ते भागते बच्चे हैं.. वही लगते सच्चे हैं

मन का स्मार्ट स्पीकर

“हे मनुष्य” “ओके मनुष्य” “थम जा मनुष्य.. आगे खाई है” ऐसे ही किसी जागृत कर देने वाले वाक्य से मन का स्मार्ट स्पीकर एक्टिव हो गया.. उसने माहौल को जज़्ब … Continue reading मन का स्मार्ट स्पीकर

Interspace : दूरी

इस कविता का जो केंद्रीय पात्र है.. वो आपकी ही तरह तैरता है हर रोज़, समय के सागर में… जहां ऊँची, तूफ़ानी लहरें आती हैं.. वहां घड़ी की सुइयों के … Continue reading Interspace : दूरी

Sapped Warrior : योद्धा की थकान ही उसकी मृत्यु है

कोरोना के संकटकाल में हर घर में थकान की पर्वत श्रृंखलाएँ बन गई हैं .. जिन्हें पार करना बहुत मुश्किल लगता है.. हालाँकि ये असंभव नहीं है..
आपको लगता होगा कि आप एक योद्धा हैं और आप थक पाने की स्थिति में नहीं है…

Digestive System : पाचन शक्ति

इस विचार को मन के मर्तबान में डाला.. धूप में रख दिया.. फिर जो बना.. वो ये रहा.. थर्मोकोल, कांच, लकड़ी, मिट्टीअन्याय, हिक़ारत, ठंडा लहू , खौलते हुए तानेसब पचा … Continue reading Digestive System : पाचन शक्ति

DROPS : बूँदें

आसमान में रहने वाली बूँदों से लेकर आँखों में रहने वाली बूँदों तक.. सबको इस एक पोस्ट में लयबद्ध किया है.. इन पंक्तियों की बारिश में आप थोड़ी देर भीग सकते हैं..

Explorer : खोजी यात्री

क्या किसी शिखर पर घर बन सकता है ?.. थोड़ा सोचा इस पर तो लगा कि अस्तित्व की ऊँची नोक पर खेल का मैदान तो नहीं हो सकता.. उस नोक … Continue reading Explorer : खोजी यात्री

Point : बिंदु

जो लोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हैं.. वो दिन भर इंसान के भाग्य पर आश्चर्य करते होंगे कि रहने के लिए ऐसा.. नीले कंचे जैसा.. ग्रह मिला है.. और उन्हें इस बात पर भी हैरानी होती होगी कि कोई खुद को कितना भी बड़ा समझे.. है तो वो एक बिंदु ही… बल्कि ये पूरा ग्रह ही एक बिंदु है.. सौरमंडल, आकाशगंगा और ब्रह्माण्ड के विस्तार में।

Effort : प्रयास

हर प्रयास की एक उम्र होती है.. फिर उसकी प्रासंगिकता खोई हुई सी लगती है.. सच ये है कि सारे प्रयास हमेशा जीवित नहीं रह सकते.. उन्हें काल खंड की कँटीली तारों को पार करने की इजाज़त नहीं होती.. प्रयासों को अमरत्व का वरदान नहीं होता… अगर सारे प्रयास.. सदा के लिए जीवित रहने लगें.. तो शायद उनकी हैसियत खत्म हो जाएगी.. हालाँकि हमारे यहां कहते हैं कि कोई प्रयास बेकार नहीं जाता… इसलिए आपकी हर कोशिश की ख़ुशबू आ जाती है और दूर खड़ा कोई अनजान व्यक्ति भी आपको पहचान लेता है… प्रयास की नदी.. पहचान वाले समुद्र में ही मिलती है

A Bridge called Father : पुल हैं पिता

एक पुल है…… जो धीरे धीरे बना है…. कई वर्षों में…. कई हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर… अनुभव और वात्सल्य के कई ट्रक… गुजर कर उस पर से… आते हैं मुझ तक

Jewel & Thorns : ज़ेवर और काँटे

Jewel : ज़ेवर वायरस की तस्वीर को देखिए ज़ूम करके किसी माइक्रोस्कोप में बिलकुल ज़ेवर की तरह लगता है ग़रीबी-भुखमरी को ज़ूम करके देखिए उसमें स्पष्ट दिखते हैं बड़े बड़े … Continue reading Jewel & Thorns : ज़ेवर और काँटे

Experience of a Sample Human 🦠 : सैंपल मनुष्य का अनुभव

कई बार लगता है कि अनुभव एक व्यक्ति से दूसरे में किसी जीवाणु की तरह यात्रा करता है.. और इस क्रम में कुछ इंसान.. दूसरे इंसानों के लिए एक सैंपल … Continue reading Experience of a Sample Human 🦠 : सैंपल मनुष्य का अनुभव

Wireless एकांत में हम-तुम कैसे है ?

आपदा, महामारी, संक्रमण के असर.. अजीब होते हैं.. जैसे कोई व्यंजन बन रहा हो.. और उसे बनाने की रेसिपी में लिखा हो… “समाज के छिलके-कूड़ा-करकट माने जाने वाले गरीब-भूखे-मजबूर-बेरोज़गार पहले … Continue reading Wireless एकांत में हम-तुम कैसे है ?

Cage 🦠 : पिंजरा

जैसे किसी बच्चे ने शरारत में एक लकीर खींच दीऔर अगले ही पलसबके आलीशान घरपिंजरे बन गए अब घरों में चिंताओं का, टकराती हुई आदतों का, बोरियत का ट्रैफ़िक जाम है..और सड़कों पर … Continue reading Cage 🦠 : पिंजरा

Womb 🦠 : वापस जा रहा हूँ माँ की कोख में

जननी ने बच्चे को दुनिया में छोड़ा था.. ममता के कवच के साथ.. पूरी रफ़्तार से.. अब दुनिया में ताला लग गया है.. तो बच्चा कह रहा है.. मैं वापस चला माँ की कोख में..

Masks 🦠 : मुखौटे

अंदर तो हमेशा ही पहनकर रखते थे ये मुखौटे अब बाहर आ गये हैं अपनी पहचान ढूँढते घूम रहे लोगों में आजकल मुँह ढकने की होड़ है अब सब एक … Continue reading Masks 🦠 : मुखौटे

Test Positive 🦠 : टेस्ट पॉज़िटिव आया है

इस समय अगर संवेदनाओँ के सैंपल इकट्ठा किए जाएं.. तो लोगों के दिलों की किताबों से कई सूखे फूल निकलेंगे.. छूते ही टूट सकने वाले… अगर किसी को ये एहसास हो जाए कि वो जहाँपनाह नहीं है.. उसकी मर्ज़ी से एक पत्ता भी नहीं हिल सकता.. तो वो एक बार ज़रूर अपना फ़ोन उठाकर किसी अपने का नंबर डायल करेगा..और जब दूसरी तरफ़ से आवाज़ आएगी.. तो देर तक ज़ुबान से कुछ नहीं निकलेगा.. शायद आँखों से निकल आए… कुछ टेस्ट ऐसे होते हैं.. जिनके सैंपल आँखों से लिए जाते हैं।