Siddharth / SidTree… A Digital Poet sitting Under a Tree, where Words merge with Music, Video & Life… 100% Digital.. 1000% Original. See Life through the eyes of a Poet Who thinks, Who sings, Who Experiments with the things, ranging from Poems, Podcasts, Book & Gadget Reviews, Life's Raw Feeds, Short films & Documentaries.

02 (Oxygen) : अपनेपन की प्राणवायु

किसी अपने को एक एक सांस के लिए तरसते देखकर… सारे कीर्तिमान… लड़ाई-झगड़े… व्यर्थ नज़र आते हैं… इस वक्त मृत्यु का बोध.. ये बता रहा है.. कि आसपास हर ज़िंदा कृति को.. अपनेपन की ऑक्सीजन की ज़रूरत है.. उन्हें ये ऑक्सीजन देते चलिए…

भारतीय नवसंवत्सर की दुर्लभ परंपरा 🇮🇳 🙏 क़र्ज़ मुक्ति का प्रमाण देने वाले कैलेंडर

विक्रम संवत 2078 आज से शुरू हुआ है… ये सामान्य (ग्रेगोरियन) कैलेंडर से करीब 57 साल आगे चलता है
विक्रम या कोई भी संवत्सर जब सामने आते हैं तो मेरी इच्छा होती है 
कि आपसे शेयर करू कि संवत्सर चलाने का हक़ किसे था

Recipe of Blood & Data : खून और आँकड़ों की ‘पाकविधि’

दवाओं और राजव्यवस्थाओं की मारक क्षमता छुपाने से लेकर विज्ञान और डर के नये नये बाज़ार बनाने तक, आंकड़ों का सामाजिक महाप्रयोग चल रहा है। आंकड़ों की बैसाखी दुनिया भर के लोगों को थमा दी गई है। और जिसके हाथ में बैसाखी हो, वो नारे नहीं लगा सकता, आवाज़ नहीं उठा सकता, आंकड़ों पर लगा ख़ून साफ़ नहीं कर सकता।

photo of black smartphone on black surface

आपके फ़ोन से कितना डेटा जाता है Google/Apple के पास?

फोन स्टार्ट होता है.. और शुरुआत के 10 मिनट में.. इतना डेटा जाता है.. Apple और Google के पास.. हर 4.5 मिनट में इन कंपनियों को डेटा की भूख लगती है

The Virus YearBook : वायरस वार्षिकी

एक साल पहले का समय याद कर लीजिए.. कोरोनावायरस तब नया डर बनकर आया था.. थोड़े दिन गुज़रे तो डर पुराना हो गया.. आदत बन गया.. फिर बेफ़िक्री आई और अब डर का सालाना Subscription Renew हो गया है। वैक्सीन के प्रति आशंकित लोगों के सामने कोरोनावायरस, एक नया डर बनकर हाज़िर है… ऐसे में वायरस वार्षिकी आपसे शेयर कर रहा हूँ।

रोशनी देने वाला लेटरबॉक्स 📮

एक लेटरबॉक्स का पेटेंट.. उसमें चिट्ठी डालने की व्यवस्था थी.. और उससे रोशनी निकलने की व्यवस्था थी.. एक ऐसा लैंप पोस्ट जो रोशनी देता था और आसपास गुज़रते लोगों को याद दिलाता था कि उन्हें किसी को याद करते हुए कुछ लिखकर भेजना चाहिए..

ख़ुद को एक फूल दिया है

75 सेकेंड्स के इस वीडियो में फूलों की कई पंखुरियों के साथ उम्मीद भी मौजूद है.. वही उम्मीद जो कुछ भी नया शुरू करते हुए हमारे अंदर होती है

बधाइयों की बर्फ़बारी.. प्रसन्नता के बिजलीघर

हर साल एक जनवरी आ ही नहीं पाती… क्योंकि इस तारीख़ पर बधाइयों की बर्फ़बारी होती हैकई बार बहुत ख़ुशनुमा … कई बार बर्फ़ सी ठंडी… कई दफ़ा निरर्थक.. और … Continue reading बधाइयों की बर्फ़बारी.. प्रसन्नता के बिजलीघर

The Camera Project : सत्य, नज़रिया और कैमरा

आंख का कोई विकल्प नहीं था मनुष्य के पास… देखने की शक्ति और जो देखा उसे निचोड़कर दिमाग की मदद से दृष्टिकोण बनाने की अद्भुत शक्ति आँखों में ही है.. … Continue reading The Camera Project : सत्य, नज़रिया और कैमरा

बेदाग़ बड़े.. और सच्चे बच्चे

जो धूल.. कीचड़ में सने हैं.. प्रेम और एसिड से जले हैं.. जिन पर जीवन के निशान पड़े हैं.. जो दौड़ते भागते बच्चे हैं.. वही लगते सच्चे हैं

मन का स्मार्ट स्पीकर

“हे मनुष्य” “ओके मनुष्य” “थम जा मनुष्य.. आगे खाई है” ऐसे ही किसी जागृत कर देने वाले वाक्य से मन का स्मार्ट स्पीकर एक्टिव हो गया.. उसने माहौल को जज़्ब … Continue reading मन का स्मार्ट स्पीकर

Interspace : दूरी

इस कविता का जो केंद्रीय पात्र है.. वो आपकी ही तरह तैरता है हर रोज़, समय के सागर में… जहां ऊँची, तूफ़ानी लहरें आती हैं.. वहां घड़ी की सुइयों के … Continue reading Interspace : दूरी

Sapped Warrior : योद्धा की थकान ही उसकी मृत्यु है

कोरोना के संकटकाल में हर घर में थकान की पर्वत श्रृंखलाएँ बन गई हैं .. जिन्हें पार करना बहुत मुश्किल लगता है.. हालाँकि ये असंभव नहीं है..
आपको लगता होगा कि आप एक योद्धा हैं और आप थक पाने की स्थिति में नहीं है…

Digestive System : पाचन शक्ति

इस विचार को मन के मर्तबान में डाला.. धूप में रख दिया.. फिर जो बना.. वो ये रहा.. थर्मोकोल, कांच, लकड़ी, मिट्टीअन्याय, हिक़ारत, ठंडा लहू , खौलते हुए तानेसब पचा … Continue reading Digestive System : पाचन शक्ति

DROPS : बूँदें

आसमान में रहने वाली बूँदों से लेकर आँखों में रहने वाली बूँदों तक.. सबको इस एक पोस्ट में लयबद्ध किया है.. इन पंक्तियों की बारिश में आप थोड़ी देर भीग सकते हैं..

Explorer : खोजी यात्री

क्या किसी शिखर पर घर बन सकता है ?.. थोड़ा सोचा इस पर तो लगा कि अस्तित्व की ऊँची नोक पर खेल का मैदान तो नहीं हो सकता.. उस नोक … Continue reading Explorer : खोजी यात्री

Point : बिंदु

जो लोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर रहते हैं.. वो दिन भर इंसान के भाग्य पर आश्चर्य करते होंगे कि रहने के लिए ऐसा.. नीले कंचे जैसा.. ग्रह मिला है.. और उन्हें इस बात पर भी हैरानी होती होगी कि कोई खुद को कितना भी बड़ा समझे.. है तो वो एक बिंदु ही… बल्कि ये पूरा ग्रह ही एक बिंदु है.. सौरमंडल, आकाशगंगा और ब्रह्माण्ड के विस्तार में।