The Joker Test of Truth 🤡 सत्य का जोकर संस्करण

आपदा के बीच पॉज़िटिव रहिए लेकिन इतना भी नहीं कि positivity की poisoning से आपकी करूणा मर जाए। False Positive वाली मन:स्थिति से सावधान रहना होगा। वर्ना सत्य का चेहरा भी जोकर के मुंह जैसा हो जाता है।

False Positive 1

राजनीति और उससे प्रेरित समूहों में इलाज और इनोवेशन की अपार संभावनाएं देखकर सामान्य बुद्धि के लोग स्तब्ध हैं
आश्चर्य है कि हाहाकार के बीच विज्ञापन, बैठकों में विमर्श और मॉरल साइंस से इलाज संभव है !!
वैसे पॉज़िटिव रहने से बगल में पड़ी लाशें दिखती हैं या नहीं इस पर रिसर्च जारी है
लेकिन इतना तय है कि सकारात्मकता और मर्यादा की फैक्ट्रियों में गज़ब उत्पादन चल रहा है!

False Positive 2

नेगेटिव हर वो समस्या है जिससे जनसमूह ने मुंह मोड़ लिया और आँखों के आगे पर्दे खींचकर अपना समाधान कर लिया। इस सुविधाजनक Exit (निकासी) से ही वो माहौल बनता है जिसे बाद में नकारात्मक बता दिया जाता है। इसीलिए हमारी परंपरा में करुणा के भाव को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता था। ताकि कोई मनुष्यता से कटे नहीं.. तकलीफ़ के बारे में बात करना नेगेटिव होना नहीं है.. जिसमें करुणा नहीं.. वो मनुष्य नहीं इसलिए करुणा के भाव का पता लगाने वाला टेस्ट करवाइये। अगर आपके अंदर करुणा है तो फिर आप नेगेटिव नहीं.. संवेदनशील हैं

False Positive 3

भारी बारिश में जिनके कपड़े और शरीर बूँदों की मार से बच गए.. उनमें से कई लोग भविष्य में बारिश के अस्तित्व को नकार सकते हैं.. ठीक उसी तरह जैसे अगर कौरव महाभारत का युद्ध जीत गए होते तो दुर्योधन लिखवा लेता कि लाक्षागृह या वस्त्रहरण कभी हुआ ही नहीं था और पांडव प्रोफेशनल जुआरी थे।

विजय और सत्य का कोई संबंध नहीं होता.. हालाँकि विजय… सत्य के होंठों के कोने में उँगली फँसाकर.. खींचती है.. और उसका चेहरा डीसी कॉमिक्स के अमर नेगेटिव किरदार जोकर जैसा दिखता है। खींचकर लंबी की गई मुस्कान… और आंसुओं से भरी लाल आँखों वाला सत्य

और अंत में दो लाइन में बात को अल्पविराम दूंगा—

लाश.. हर आंकड़े से बड़ी होती है
सत्य की तरह, फिर खड़ी होती है

याद रखेंलाशों और दुखों से घिरे लोगों को Positivity के प्रवचन देने वाले चैंपियन ऐसे लगते हैं


सिद्धार्थ की दूरबीन 🔭 | © Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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