02 (Oxygen) : अपनेपन की प्राणवायु

एक एक सांस को सहेजकर… धुन में बांधकर.. तुम्हारे लिए थोड़ी सी प्राणवायु… लेकर आया हूं…
ये भी ऑक्सीजन है…. इसका सिलेंडर मुफ्त है…. सबके लिए उपलब्ध है…
वीडियो ये रहा ▼ — 99 sec — Use 🎧  for better experience


तुम्हारी साँस से मेरी साँस का रिश्ता है
हमारे दर्द मिलते हैं.. तो फ़ासला मिटता है

हर साँस में छोटी सी मौत का धोखा है
हर साँस में एक नये जन्म का मौक़ा है

हर बार ये सांस.. हवा बन जाती है
हर बार ये नाज़ुक देह छूट जाती है

सब जोड़ते हैं साँसों की कड़ियों को
तो जीवन की डोर जुड़ जाती है


किसी अपने को एक एक सांस के लिए तरसते देखकर… सारे कीर्तिमान… लड़ाई-झगड़े… व्यर्थ नज़र आते हैं… इस वक्त मृत्यु का बोध.. ये बता रहा है.. कि आसपास हर ज़िंदा कृति को.. अपनेपन की ऑक्सीजन की ज़रूरत है.. उन्हें ये ऑक्सीजन देते चलिए…

One Reply to “02 (Oxygen) : अपनेपन की प्राणवायु”

  1. भावों की स्वास और भवनाओं के निःस्वास से मजबूत होते एहसास की ऊर्जा

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