भारतीय नवसंवत्सर की दुर्लभ परंपरा 🇮🇳 🙏 क़र्ज़ मुक्ति का प्रमाण देने वाले कैलेंडर

समस्त भारतवर्ष के लिए चैत्र नवरात्र, नववर्ष/नवसंवत्सर के शुभ होने की कामना करता हूँ
नोट करने वाली बात ये है कि नवसंवत्सर शुभ और कर्ज़मुक्त आचरण से जुड़ा है

विक्रम संवत 2078 आज से शुरू हुआ है… ये सामान्य (ग्रेगोरियन) कैलेंडर से करीब 57 साल आगे चलता है
विक्रम या कोई भी संवत्सर जब सामने आते हैं तो मेरी इच्छा होती है 
कि आपसे शेयर करू कि संवत्सर चलाने का हक़ किसे था
आदरणीय चंद्रकांत बाली जी का एक लेख मैंने बहुत पहले पढ़ा था.. 
उसकी कुछ स्मृतियाँ मेरे मन में बची हैं। उससे मुझे एक बहुत शानदार भारतीय परंपरा का ज्ञान मिला था..
उन्होंने लिखा था कि हमारे देश में अपने नाम का कैलेंडर चलाने का अधिकार
केवल उसी राजा को था जिसके राज्य में एक भी व्यक्ति ऋणी या क़र्ज़दार न हो
ये प्रक्रिया वर्षों चलती थी।

विक्रम संवत या किसी भी राजा के नाम पर बना कैलेंडर कितना बड़ा प्रशस्ति पत्र रहा होगा.. ये सोचकर देखिए। समृद्धि की ऐसी परंपरा के बारे में जानकर मन प्रसन्न हुआ। इसीलिए मन हुआ कि इस संवत्सर के बारे में आपको बताऊँ।
आज का भारत या दुनिया का कोई भी देश इसकी कल्पना नहीं कर सकता..

चंद्रकांत बाली जी संस्कृत के बड़े अध्येता थे। उन्होंने रामायण और महाभारत के काल निर्धारण और सौर वर्षों पर एक पुस्तक लिखी थी। जिसकी उतनी चर्चा नहीं हो पाई.. लेकिन ये काम एक तरह से मील का पत्थर है।

एक बात और.. चंद्रकांत बाली जी के परिवार में ये परंपरा थी कि जब नई पीढ़ी के बच्चे का पहला लेख छपता था.. तो इसका उत्सव मनाया जाता था। उनके सुपुत्र सूर्यकांत बाली जी भी बड़े आदरणीय लेखक हैं।

इस प्रसंग के साथ पुनः शुभकामनाएँ
– सिद्धार्थ ✍️ SidTree 

सिद्धार्थ की दूरबीन 🔭

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