चांद के टुकड़े : Pieces of Moon

© Photograph by Legendary Photo Artist Raghu Rai

उसकी आँख खुली तो वो एक ऐसे शहर में था
जहां सभी के मुखड़े चांद के टुकड़े थे
पराई पूँजी के आलोक से चमकते
इन चाँद से मुखड़ों की ..
ऊबड़ खाबड़ सतह ..
एक मालामाल उपभोक्ता की तरह रोशनी में नहाई रहती

बहुत दूर से
रोशनी को सबकी तरफ ठेलते
पसीने से लथपथ सितारे
यही सोचते रहते
कि उनकी सारी रोशनी
आखिर टैक्स में क्यों कट जाती है ?

हर उपभोक्ता की मंद मंद मुस्कान में
निर्माता के पैरों की बेवाइयां दिखती हैं

Poem by Siddharth Tripathi

© Photograph by Legendary Photo Artist Raghu Rai
Siddharth | सिद्धार्थ
Siddharth | सिद्धार्थ

काव्य के नये सूत्र, नये आयाम रचने की कोशिश है, डिजिटल दौर में कुछ महसूस कर पाना ही सबसे बड़ी पूँजी है, वही बाँट रहा हूँ

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हर उपभोक्ता की मंद मंद मुस्कान में .. निर्माता के पैरों की बेवाइयां दिखती हैं .. #kavivaar में इस बार पराई पूँजी के आलोक से चमकने वाले चांद के टुकड़ों को देखिए.. आपके आसपास कई होंगे …

1 Comment

  1. क्या गहराई है सर्, ग्रेट है आप आपकी लेखनी को नमन है🙏🙏

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