‘संकटमोचक Mask’ पर 3 रिसर्च पेपर

कोरोना वायरस पर रिसर्च करते हुए पिछले दिनों 3 रिसर्च पेपर पढ़े

इनमें से एक नेचर मेडिसिन में छपा है… और दूसरा रिसर्च पेपर थोड़ा पुराना है.. उसे केंब्रिज जर्नल्स में 2013 में छापा गया था और तीसरा स्टैनफर्ड मेडिसिन का है। इन तीनों रिसर्च पेपर्स के ज़रिए कुछ महत्वपूर्ण पहलू सामने आए.. सोचा आपके साथ भी शेयर कर लेते हैं

गंभीर रोगी के छींकने, खाँसने या फिर साधारण रूप से साँस छोड़ने से भी उसके आसपास वायरस की मौजूदगी हो जाती है। इसे अंग्रेज़ी में Viral Shedding भी कहते हैं

सर्जिकल मास्क पहनकर इस तरह होने वाले संक्रमण से बचा जा सकता है 👇

अलग अलग तरह के वायरस को रोकने में सर्जिकल मास्क किस तरह प्रभावी हो सकता है इसकी बाक़ायदा रीडिंग ली गई है 👇

स्टैनफर्ड की स्टडी के मुताबिक सर्जिकल मास्क को गर्म हवा में कुछ समय तक रखकर सैनिटाइज़ भी किया जा सकता है। ताकि इसे दोबारा प्रयोग में लाया जा सके। ऐसा करना सामान्य परिस्थितियों में उचित तो नहीं है.. लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में ओवन में 70 डिग्री तक गर्म हवा में रखना ठीक रहेगा। इस स्टडी में ये भी लिखा है कि सर्जिकल मास्क को अल्कोहल से साफ करके सुखाना और दोबारा इस्तेमाल करना ठीक नहीं रहेगा.. क्योंकि इससे मास्क की फिल्टर करने की क्षमता कम हो जाएगी 👇

और तीसरी स्टडी ये बताती है कि अगर किसी घरेलू कपड़े की दो लेयर बनाकर उसका मास्क तैयार किया जाए तो वो कैसा फिल्ट्रेशन करेगा ? 👇

मोटे तौर पर इतना जान लीजिए कि
100 प्रतिशत कॉटन की टीशर्ट – 69 प्रतिशत फिल्ट्रेशन करेगी
कॉटन मिक्स – 74 प्रतिशत
स्कार्फ – 62 प्रतिशत
लिनेन – 60 प्रतिशत
सिल्क – 58 प्रतिशत फिल्ट्रेशन करेगा
हालांकि फिल्ट्रेशन अलग अलग जीवाणुओं के आकार पर भी निर्भर करता है.. पर फिर भी थोड़ा बहुत बचाव तो होगा ही।

 

Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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