Infection 🦠 : संक्रमण

जब दुनिया के तमाम हिस्सों में एक वायरस ताला लगा रहा हो, इंसान को मजबूर कर रहा हो कि वो अपनी ही बनाई अट्टालिकाओं और अपने ही कीर्तिमानों में क़ैद रहे.. तो इंसान के मन में अपने अस्तित्व, अपनी संवेदनशीलता और अपने संबंधों को लेकर सवाल उठते हैं। संक्रमण के बीच ये आत्मावलोकन और रचना-धर्म का समय है.. कविवार में कोरोना काव्य श्रृंखला की पहली रचना प्रस्तुत है.. आगे और रचनाएँ आती रहेंगी। शरीर लॉकडाउन हो सकता है.. मन को लॉकडाउन नहीं किया जा सकता

हर मुलाक़ात संक्रमित है
माथे को सहलाने वाला हाथ संक्रमित है
प्रेम के रखवाले अब दल बदल चुके
स्नेह लेप लगाने वाला साथ संक्रमित है
एक विषाणु किसी का क्या बिगाड़ेगा ?
जहाँपनाह पूरे के पूरे आप संक्रमित हैं

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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