W-Energy : 👩🏻 ‘शक्ति’

Not a Single day in my life is possible without that sparkle, that magic of women in my life… So.. everyday is Women’s Day. I want to share some of my poems & thoughts on Womanhood. These Poems talk about Present, essence of Past and trajectories of Future.

भाव

माँ, पत्नी, बहन, बेटी, मित्र या भरोसेमंद अजनबी बनकर आई है,
वो हर रूप में शक्ति बनकर.. हर पुष्प को पालने वाली पत्ती बनकर आई है।

वैसे तो नारी शक्ति सेमिनार वाला शब्द बनकर घिस चुका है पर मैंने इसे विस्तार देकर कुछ प्रयोग किए हैं
इन कविताओं और विचारों में नारी की निडरता है, समुद्र की तरह हर चीज़ को समाहित करने वाली विशालता और वात्सल्य है। कुंठा, अश्रु और हताशा का गोंद है जो औरतों के पैरों को चिपका लेता है और उड़ने नहीं देता। इनमें नारी का वो प्रेम है.. जो आवरण बनकर अपनी छोटी सी दुनिया को ढक लेता है… और बराबरी के अधिकार की वो ख्वाहिश भी जो दूसरी तरफ़ झुके तराज़ू को वापस अपनी तरफ़ खींचना चाहती है।

न तो औरत होना आसान है.. और न ही औरतों को समझना फिर भी जो महसूस किया है उसे तरह तरह से कहने की कोशिश की है.. ये अनुभव जीवन भर के हैं.. जिन्हें पिछले बीस वर्षों में लिखा गया है।

  1. Fearless : निडर औरतें
  2. Mother of My Child : मेरे बच्चे की मां
  3. Tears & Acid : पैरों पर तेज़ाब डालने वाली औरतें
  4. Blood Report : लहूलुहान इम्तिहान
  5. Essence of a Woman : स्त्री तत्व
  6. प्रश्नPoetry : बेचारी या Bitch ?
  7. Right to Equality : बराबरी का अधिकार
Fearless : निडर औरतें

उनकी आंखों के काजल में
पारिवारिक उम्मीदों की राख होती है
उनकी हंसी से बार बार सिसकियां झांकती हैं
उनके सुर्ख़ होंठ.. किसी को लाल सलाम नहीं करते
निडर होना क्या है ?

जलना हर रोज़, और चलना..
पायल की आवाज़ को संभालते हुए
खुद को साबित करने की अग्निपरीक्षा देते हुए
ये कहते हुए कि तुम्हारी दुनिया जिस धुरी पर टिकी है
वो मैं हूं…

तुम नहीं भी हो..
तो भी मैं हूं
Mother of My Child : मेरे बच्चे की मां

आजकल
मैं अपने बच्चे की मां के साथ रहता हूं
स्त्री चाहे किसी रूप में कितने भी वर्ष सांस लेती रहे
लेकिन उसके जीवन का उत्सव सिर्फ मां के रूप में है
विवाह करके दुनिया के सभी पुरुष ये सीखते हैं
कि वात्सल्य और करुणा सबसे बड़ी भावनाएं हैं
Tears & Acid : पैरों पर तेज़ाब डालने वाली औरतें

औरत के आँसू
आँखो से उतरकर रुखसार पर आते हैं
फिर गर्दन, छाती और पेट पर चलते हुए ..
कमर से उतरकर पैरों पर ठहर जाते हैं
लेकिन तब तक आँसुओं की तासीर बदल चुकी होती है
ये आँसू औरत के पैरों में गोंद की तरह चिपक जाते हैं
वो गोंद जो उड़ने नहीं देता
सोचने समझने नहीं देता
हार मानकर बैठी भीड़ में
मैंने कुछ औरतों को देखा है
जो अपने पैरों पर तेज़ाब डालने से नहीं डरतीं
Blood Report : लहूलुहान इम्तिहान

एक पिंड जो साकार ना हो सका गर्भ में
महीने भर की कुढ़न, पीड़ा और जलन के साथ स्खलित हो गया
अश्रु थे.. जो रक्त बनकर
बह गये
बिना कुछ कहे
प्रतीक्षा करते करते

ये इंतज़ार एक लहूलुहान इम्तिहान है
जो दुनिया की हर स्त्री ने
बार बार दिया है
बार बार जिया है

Essence of a Woman : स्त्री तत्व

चाहे परिवार के लिए अपनी नींद के टुकड़े करने हों या प्रेम की आँच में जलकर भी किसी से चिपके रहना हो। स्त्री ने हर इम्तिहान दिया है, बहुत सारा सम्मान अपने नाम किया है।

Need You : ज़रूरत

मुझे तुम चाहिए होती हो, पर मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए होता

Sleep in Pieces : नींद के टुकड़े

उसकी नींद के टुकड़े मेरी मोहब्बत का सामान बन गये हैं

Charred in love : जलकर चिपका हुआ प्रेम

आंच ज़्यादा होने पर
जैसे दाल, सब्ज़ी या रोटी, लग जाती है, चिपक जाती है बर्तन से…
वैसे ही वो भी लग गई है मुझसे

First Home : पहला घर

तुमने खुद में ज़िंदगी को पनाह दी है
तुम्हारी पलकों पर मेरे लबों से लिखी इबारत कुबूल हो

Stairs : सीढ़ियां उतरते हुए

आज दीवारों से दरारें झाँक रही थीं
उम्र की सीढ़ी से उतरते हुए
वो काँप रही थी
प्रश्नPoetry : बेचारी या Bitch ?

बेचारी और Bitch
इन दो शब्दों, दो भाषाओं, दो संस्कृतियों के बीच खड़ी औरतें,
किसी तीसरे शब्द का इंतज़ार कर रही हैं।
क्या ये तीसरा शब्द ही तीसरा विश्वयुद्ध है ?
Right to Equality : बराबरी का अधिकार

और इस विशेष कविवार के अंत में बराबरी का अधिकार।
एक बात बताइये..क्या स्त्री और पुरुष..गुणों की किसी भी एक कसौटी पर बराबर हो सकते हैं? इसका जवाब है नहीं, ऐसा कभी नहीं हो सकता.. क्योंकि स्त्री और पुरुष के कुछ स्वाभाविक गुण हैं और वही गुण उन्हें अलग या विशिष्ट बनाते हैं। बराबरी का मतलब ये नहीं है कि स्त्री और पुरुष अपने स्वाभाविक गुणों को खो दें और सब एक जैसे हो जाएं.. सबकी एक जैसी शक्ति, एक जैसा स्वभाव। ये संसार के साथ सबसे बड़ी क्रूरता होगी। दिक्कत ये है कि स्त्री के स्वाभाविक गुणों को कमज़ोर मान लिया गया है। नाज़ुक होना, संवेदनशील होना भी एक शक्ति है, लेकिन इसे कमज़ोर मान लिया गया ।

आपने विलोम शब्दों के बारे में पढ़ा होगा। अंग्रेज़ी के लेंस से देखें तो Female वो है जो Male का विपरीत हो. यानी स्त्री का अस्तित्व ही एक विलोम शब्द के रूप में रच दिया गया। हालांकि मूल रूप से ऐसा नहीं था। Female को फ्रेंच भाषा के शब्द Femelle से उठाया गया और ध्वनि के आधार पर उसके अंत में Male जोड़ दिया गया। डिक्शनरी (शब्दकोश) या थिसॉरस (समांतर कोश) में खोजेंगे तो Female को अर्थ देने वाले कई मुलायम शब्द आपको मिलेंगे। सौंदर्यबोध, नज़ाकत, लालित्यमय, चारु भाव… आप देखते चले जाएंगे.. लेकिन स्त्री सौंदर्य को शब्दों में व्यक्त करने की उपमाएं ख़त्म नहीं होंगी।

यानी सामान्य सी डिक्शनरी में भी स्त्री के मूल स्वभाव की ताकत देखी और समझी जा सकती है। लेकिन अब स्त्रियों की एक पूरी भीड़, अपनी तराशी हुई काया और त्वचा के भीतर.. पुरुष हो जाना चाहती है। Female शब्द से F और E को काटकर फेंक देने की ये भूख, बराबरी के अधिकार का मुखौटा लगाकर आई है। और सबसे बड़ा मज़ाक ये है कि स्त्रियां अपने सांस्कृतिक कद से गिरकर, उसे छोटा करके पुरुषों के बराबर होना चाहती हैं।

भारतीय संस्कृति में स्त्री के गुणों को देवतुल्य माना गया है। जितने भी देवता हुए हैं उनमें स्त्री गुण अधिक थे जबकि राक्षसों में स्त्रियों के गुण कम होते थे। इसी देश में अर्धनारीश्वर की कल्पना की गई। और ये भी सच है कि इसी देश में बलात्कार हो रहे हैं, मनुहार/छेड़छाड़ के बजाए बदतमीज़ी/अश्लील हरकतें हो रही हैं। इस संदर्भ में स्त्रियों का विद्रोह उचित भी लगता है, लेकिन थोड़ी देर विचार करने के बाद आप पाएंगे कि स्त्री और पुरुष अपनी अपनी जगह पर विशिष्ट तो हो सकते हैं, लेकिन बराबर नहीं हो सकते। Comics और सुपरहीरो सिनेमा की नज़र से देखें तो ये Hard Superpowers और Soft Superpowers का द्वंद्व युद्ध है। और इसमें वही जीतेगा जो कुंठित नहीं होगा। Wonder Woman और Super Man, चाहें तो एक ही दौर में, एक ही फिल्म में काम कर सकते हैं। नवरात्र से पहले देवियों की स्तुति करते हुए इन्हीं विचारों की आहुति दे रहा हूं।

इस पूरे भाव पर जब मैं कविता लिख रहा था तो मुझे लगा कि इस कविता को थोड़ा क्रूर होना चाहिए, थोड़ा खुरदरा होना चाहिए। ये ऐसी बात है जो सबको चुभनी चाहिए।

स्त्री और पुरुष के बीच
बराबरी का एक ही रास्ता है
स्त्री में मौजूद स्त्री-तत्व को मरना होगा
जीवन का सारा नाज़ुक सौंदर्य
खुद पर तेल छिड़ककर आग लगा लेगा
और सती हो जाएगा

बराबरी के सिद्धांत
कुंठाओं की कलम से लिखे गये थे
उस कलम में एक ही रंग था
पता नहीं क्यों विजय का रंग
खून जैसा लाल ही होता है
इसलिए..
अब हम सब एक जैसे होंगे
सबकी एक जैसी तासीर
एक जैसा रंग
एक जैसा स्वभाव

तुला के एक पलड़े पर
स्त्री ने अपने वक्षों को काटकर रख दिया है
बराबरी के अधिकार के लिए
ये बलिदान याद रखा जाएगा

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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