Theatrics of Knowledge 🎭 ज्ञान का अभिनय

जहां अभिनय है, वहां ज्ञान सिर्फ़ एक दर्शक बनकर.. बस थोड़ी देर के लिए बैठ सकता है!

जब शहर में आग लगी हुई थी..
वो चुप था..
उसकी अंतरात्मा पर बीस सेंटीमीटर की बर्फ़ गिरी हुई थी

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जब दंगे हो रहे थे..
तब उसने परचून की दुकान खोल ली थी
और दाम बढ़ा दिए थे

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जब जनआंदोलन की भूख बढ़ी..
उसने झट से अपना संदूक खोला
और पाचन की गोलियां निकाल ली..
सबको तुरंत डकार आ गई थी

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नीति निर्माताओं ने जब नैतिकताओं का गर्भपात किया
तब उसने होनूलुलु की अर्थव्यवस्था पर चर्चा शुरू कर दी

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आक्रामक कवि लाइन में लगकर बड़े होने का सर्टिफिकेट ले रहे थे
मुलायम कवि.. भीगे होंठ, ज़ुल्फ़ और बदन पर मांसल कविताएँ लिख रहे थे

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ऐसी तरकीबों का सोमरस लोकप्रिय था.. खूब बिकता था
इसे बेचने वाले विक्रेता और पीने वाले लोग दोनों नशे में थे
नशे के उस पैकेट पर साफ़ साफ़ लिखा था
“ज्ञान का अभिनय सबसे ख़तरनाक होता है”
पर किसी ने पढ़ा नहीं..

 

उपसंहार

आगे तीव्र मोड़ है…. जब सड़क पर अचानक ये लिखा हुआ दिखता है.. तो हर ड्राइवर सावधान हो जाता है.. लेकिन जब ज्ञान के लेन-देन आदान-प्रदान में घुमावदार मोड़ लाए जाते हैं और मूल उद्देश्य भटक जाते हैं.. तो किसी को पता भी नहीं चलता। ज्ञान का अभिनय सीधे दिमाग पर क़ब्ज़ा करता है और फिरौती में न जाने क्या क्या मांग लेता है.. इसलिए.. ज्ञान का अभिनय सबसे ख़तरनाक होता है। इससे सावधान रहिए.. ज्ञानचक्षु खोलिए.. भ्रम दूर हो जाएंगे

 

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

3 Replies to “Theatrics of Knowledge 🎭 ज्ञान का अभिनय”

  1. जय हो प्रभु
    जीवन रंगमंच है
    हम सब कठपुतलियां हैं
    जिसकी डोर ऊपर वाले के हाथ मे है
    आपका ऊपर वाला कौन है
    इस पर निर्भर करता है कि
    आप अभिनय में हैं
    या स्वाभाविक

  2. बहुत बढ़िया…

    ज़ी, आज तक में भी इसे बचाकर रखने के लिए साधुवाद

  3. डिस्क्लेमर:- अभिनय वाला ज्ञान जोखिम की वस्तु है।कृपया सेवा शर्ते ध्यान से पढ़ें।😀🙏 बहुत उत्तम

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