Cold Blooded Species : ठंडे खून वाली प्रजातियां !

ये चार कविताओं का एक फोल्डर है

  1. ‘Master’-Key : चाबी व्यवस्था के पास है
  2. Road Roller : सावधान, आदमी काम पर हैं
  3. Spine : रीढ़ की हड्डी
  4. Questions : प्रश्न

एक लाइन में कहूं तो… रोडरोलर में एक चाबी लगाई गई, और कुचल डाला गया रीढ़ की हड्डी को… ये एक लाइन इन 4 कविताओं की आत्मा से गुज़रने वाला धागा है। ये सामाजिक भी हैं और इनमें मानवता के प्रतिमान ढूंढने वाले प्रश्न भी हैं। ध्यान रखिएगा कि प्रश्न हमेशा प्रश्नचिन्ह के कपड़े पहनकर नहीं आते..

 

‘Master’-Key : चाबी व्यवस्था के पास है

कभी ठहरकर तो कभी चिल्लाकर
हर आदमी कुछ कह रहा था
रगों में खून
प्रवक्ता की तरह बह रहा था

तुम चाहो.. ना चाहो
तुम सुनो.. ना सुनो
मैं भी कह रहा था
वो भी कह रहा था

पदचिन्हों को सूंघती हुई भीड़
एक बंद कमरे में पहुंच गई थी
वहां हर कोई
खिड़की के अभाव को सह रहा था
रगों में खून
प्रवक्ता की तरह बह रहा था

और हां
कमरे की चाबी ‘व्यवस्था’ के पास थी

 

Road Roller : सावधान, आदमी काम पर हैं

स्वामी की बोली
शाबाशी
प्रशस्ति पत्र
हर बात को सत्यापित करने वाली भीड़
शक्ति, पैसा और प्रभाव

ये सारा सामान इकट्ठा करके
ईंधऩ बनाया गया
उसे रोड रोलर में डाला गया

अब सड़क बनाई जा रही है
कुछ ऊंचे, नीचे, नुकीले हिस्से
बराबर किए जा रहे हैं
बादशाह सलामत इस सड़क से गुज़रने वाले हैं

 

Spine : रीढ़ की हड्डी

रीढ़ विहीनता के रोग की शिकायत
हर किसी से हो सकती है
परंतु…
तुमसे कोई शिकायत नहीं
कभी हो ही नहीं सकती

कृपानिधान ने
तुम्हें सुविधा दी है
कीड़े-मकौड़े के रूप में
रीढ़विहीन जीवन जीने की

तटस्थता के ये तमाम गुणसूत्र
हर कदम पर ये लकवाग्रस्त आनंद
मेरी तरफ़ से
अनंत शुभकामनाओं सहित

 

Questions : प्रश्न

प्रश्न हमेशा प्रश्नचिन्ह के कपड़े पहनकर नहीं आते..
ये जम जाते हैं ठंडे खून में…
फिर क्यूब बनकर पहुंच जाते हैं ग्लास में
यूं प्रश्न.. सामान बन जाते हैं.. मनोरंजन का
हर घूंट के साथ
इनकी मादकता बढ़ती जाती है
और इस तरह कुछ प्रश्न
भुला दी जाने वाली बहस में खो जाते हैं

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

1 Comment

  1. तटस्थता के ये तमाम गुणसूत्र
    हर कदम पर ये लकवाग्रस्त आनंद
    यूं प्रश्न.. सामान बन जाते हैं.. मनोरंजन का
    हर घूंट के साथ
    इनकी मादकता बढ़ती जाती है
    और इस तरह कुछ प्रश्न
    भुला दी जाने वाली बहस में खो जाते हैं
    मेरी तरफ़ से
    अनंत शुभकामनाओं सहित

    ( कविता में ही टिप्पणी मिल गयी
    (सो वही लिख दिया
    ( पढ़ा और खुद को बुन लिया
    (काव्य का कथ्य
    (किसी का शिल्प हो जाए
    (बस यही से सृजन सिद्ध हो जाये…😊🙏

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