तटस्थता के ये तमाम गुणसूत्र
हर कदम पर ये लकवाग्रस्त आनंद
यूं प्रश्न.. सामान बन जाते हैं.. मनोरंजन का
हर घूंट के साथ
इनकी मादकता बढ़ती जाती है
और इस तरह कुछ प्रश्न
भुला दी जाने वाली बहस में खो जाते हैं
मेरी तरफ़ से
अनंत शुभकामनाओं सहित

( कविता में ही टिप्पणी मिल गयी
(सो वही लिख दिया
( पढ़ा और खुद को बुन लिया
(काव्य का कथ्य
(किसी का शिल्प हो जाए
(बस यही से सृजन सिद्ध हो जाये…😊🙏

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