A Silent Room Burns 🔥 ख़ामोश कमरा जलता है

ये कविता 12 साल पुरानी है, इसमें एक ख़ामोश कमरा है, जो किसी किताब की तरह सारे लम्हों को अपने अंदर समेटे हुए है। ये भी कह सकते हैं कि जिस कमरे की मैं बात कर रहा हूं वो एक किताब है, जिसके 6 पन्ने हैं, चार दीवारों को चार पन्नों के बराबर मान लीजिए.. फिर छत का एक पन्ना और फर्श भी तो एक पन्ना ही है। इन पर आँखों की क़लम कुछ न कुछ लिखती रहती है। लम्हों और कहानियों से भरा ऐसा कमरा आपकी ज़िंदगी में भी होगा… ये कमरा अक्सर ख़ामोश रहता होगा और हौले हौले जलता होगा।

A Silent room burns, with all memories

मेरी दीवारों पर लम्हों के घरौंदे हैं
लफ़्ज़ों के तिनके जोड़ जोड़ के,
बनाए तमाम नशेमन

लफ्ज़ जाने पहचाने से
झूमते नाचते हैं…
सूफी दरवेशों की तरह

और पीली लपटें
गुनगुनाती हैं
मानो
धुआं फूंकती हों
जवां चूल्हे में

एक ख़ामोश कमरा
यूं जलता है,
धीमा धीमा सा
नाच चलता है

 

International Version

My room is like a book
With Six pages
My eyes are like a pen
Writing the world
on walls… on roof.. on floor

Walls are full of words
Some words twinkle like stars on the roof
Some are dancing like sufi saints
Some are playboys
Some are crying their heart out

Yellow flames
smudging their individuality
Dancing letters,
slowly moving towards a meaning
and a Silent room burns

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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