Face ID : चेहरा है, मुखौटा है, मोह-माया है, खोया-पाया है !

हर चेहरे में वक़्त के ताबूत दफ़्न होते हैं। अंग्रेज़ी में कहूँ तो – Your Face Buries, Coffins of Time ! इस विचार से एक रेखाचित्र और दो कविताओं की रचना हुई। पहले रेखाचित्र देखिए। इसमें आपको एक चेहरे की बनावट और उसमें अंगूठे के निशान जैसी आकृति दिखाई देगी।

रेखाचित्र ये कहता है कि हर चेहरे में वक़्त के ताबूत दफ़्न होते हैं और चेहरे का बाहरी आवरण और उसके पीछे छिपी धूर्तता, समय के साथ क्रमश: सार्वजनिक होती जाती है। इसे आप एक तरह से Face Identification या Face ID भी कह सकते हैं। और इसी शब्द ने मेरे मन में – एक साथ मिलकर कोई भी कर्म करने वालों के बीच, पहचान के संघर्ष को शाब्दिक रूप दिया। किसी भी कर्म के दो हिस्से होते हैं एक बाहरी – जो सबको दिखाई देता है और एक अंदरूनी – जो उस कर्म की आत्मा बनकर अंदर विद्यमान रहता है।

चेहरे और मुखौटे का बिंब बनाकर मैंने ये बताने की कोशिश की है कि साझे का कर्म, और साझे की कामयाबी को जब अलग अलग करके देखा जाता है और उसका अन्वेषण/विश्लेषण किया जाता है तो बहुत सारे भ्रम टूट जाते हैं। ये नहीं भूलना चाहिए कि हासिल-ए-महफ़िल (कर्म का मक़सद और प्रतिफल) क्या है? हम मुस्कान पाने के लिए चले थे, जगह जगह Smileys चिपकाने के लिए नहीं।

Face or Mask ? | पहचान कौन ?

हम चेहरा हैं
तुम मुख़ौटे हो
ना तुम्हें कोई जानता है
ना हमें कोई जानता है

जिसे हासिल कर तुम मर्ज़ हुए
जिसे छोड़ कर हम ख़र्च हुए
ना इसे कोई जानता है
ना उसे कोई जानता है

बस एक चेहरा है,
और एक मुखौटा है,
फिर मोह-माया है,
और खोया-पाया है !

Smiley : मुस्कान का प्रचार

सफ़ल जीवन के प्रचार की पहली शर्त है
हँसता.. मुस्कराता हुआ चेहरा
इसलिए हर चेहरा एक Smiley बनकर घूम रहा है
असली चेहरे दिखते कहां हैं आजकल ?

1 Comment

  1. चिपकी थी अरसे से मुंह पे जो झूठी मुस्कान
    सोशल को जब मीडिया मिल गया तो स्माइली बन गयी😊

    सब मोहमाया है
    मर्ज़ भी खर्च भी
    चेहरे भी और मुखौटे भी।
    जंगल मे चेहरे थे
    सभ्यता आई तो मुखौटे बन गए
    खुद पे और हालात पे हँसना आया तो 😀बन गए

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