चिपकी थी अरसे से मुंह पे जो झूठी मुस्कान
सोशल को जब मीडिया मिल गया तो स्माइली बन गयी😊

सब मोहमाया है
मर्ज़ भी खर्च भी
चेहरे भी और मुखौटे भी।
जंगल मे चेहरे थे
सभ्यता आई तो मुखौटे बन गए
खुद पे और हालात पे हँसना आया तो 😀बन गए

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