ख़ुद को लिखी चिठ्ठियां : Letters soaked in Pain

 

Try to Stand, Talk & Walk…. while you are Melting !

जब ज़ुल्म बढ़ता है
मैं खुद को चिट्ठियां लिखता हूं

गुस्से को सहलाता हूं
उसे मिट्टी से नहलाता हूं

लेकिन न्याय नहीं मिलता
तपिश कम नहीं होती

तराज़ू के कांटे पर नंगी खड़ी
सबकी चुप्पी देखो कम नहीं होती

जब दर्द बढ़ता है
मैं ज़ेहन पर बर्फ मलता हूं

चलता रहता हूं
भले ही रोज़ गलता हूं

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

1 Comment

  1. Hello siddharth sir, after a very long time, I checked the website and started reading your Poetries. Right now m feeling so good. It seems poem has two title “ख़ुद को लिखी चिट्ठियां” and “Letters soaked in pain” I loved the 2nd one N also loved. “TRY TO STAND ………. WHILE YOU ARE MELTING”! ( Written in Red, below the talking picture of Dry Leaf which demonstrate the Title “Letters (Life) soaked in pain” ) such a deep and beautiful Poetry. वैसे सर आपकी poetries पढ़ने के लिए समझ भी बहुत होनी चाहिए या बोल सकते हैं समझने के लिए दिमाग होना चाहिए।

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