19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा

आसमान ने हीरे की अंगूठी पहनी है
दिलों की बर्फ़ पिघल रही है
जमी हुई चेतना पंख फड़फड़ा रही है
हर कोई ठंडे घरों से बाहर निकलना या झाँकना चाहता है
सूर्य की इन किरणों में प्रेम की अनुभूति है
क्या वाग्देवी सरस्वती ने खुद ये मौसम लिखा है ?
ज़रूर उन्होंने ही लिखा होगा,
क्योंकि इंसान की लिखी हुई चीज़ें तो अक्सर कॉन्क्रीट की होती हैं

क्या बेचैन, भागता हुआ, अट्टालिकाओं से झाँकता हुआ,
बड़ा आदमी इस भाषा को पढ़ सकता है ?
ये भाषा आज के दिन में सिमटी हुई है
और इसका इल्म होना ही वसंत पंचमी है

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

2 Replies to “19 Degree Celsius : वो मौसम जो खुद वाग्देवी सरस्वती ने लिखा”

  1. ऐसे नए प्रतीक भी देवी सरस्वती ने ही रचें हैं ऐसा लगता है।बहुत सुंदर सामयिक कविता।

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