zZZZ 😴 : निद्रा सुख

नींद का सुख हर किसी को नहीं मिलता। दिन में कई बार सोने और जागने के बीच की अवस्था में रहते हैं, हम लोग। इस सोने और जागने के बीच में कमाना, लड़ना, भोगना, मार खाना और छोड़ना.. सब चलता रहता है। हाल ही में एक विकसित देश में हुआ रिसर्च पढ़ रहा था, उसमें लिखा था कि अगर देश के नागरिक हर रात सात घंटे की नींद लेने लगें, तो देश का GDP बढ़ जाएगा। सोने से देश की सेवा भी हो सकती है, ये बात भारत जैसे विकासशील देश में शायद किसी को समझ में नहीं आएगी। प्राचीन भारत विश्वगुरु रहा होगा, लेकिन इस दौर के भारत में, दूसरे को खुश देखकर लोगों के भीतर का श्मशान सुलगने लगता है। एक पुरानी सूक्ति है – अगर किसी के दिमाग पर कब्ज़ा करना है तो उसकी नींद छीन लो, दिन-रात उसे अति-सावधान मुद्रा में रखो जैसे किसी भी वक़्त उस पर हमला हो सकता है, ज़ाहिर है ऐसी परिस्थिति में दिमाग सोचने-समझने लायक नहीं बचेगा। देश के विकास में लगी सारी व्यवस्थाएं, यही कर रही हैं। वो कम सोने को जीवन जीने का गोल्ड स्टैंडर्ड बनाकर बेच रही हैं। ऐसे निरर्थक परिश्रम को त्याग कहना, असली त्याग करने वालों का अपमान है। वैसे नींद छीनने की कला को आजकल ‘मनुष्य-प्रबंधन’ कहा जाता है और नींद छिनने के बाद लोग बदहवास और बौराए हुए से घूमते हैं। फिर जो सामने आता है वो उनका शिकार बन जाता है। ठंड में गिन गिनकर कामवाली के नागे काटते हैं, किसी भी तरह के शोषित व्यक्ति या जंतु को देखते ही दरवाज़े-खिड़कियां बंद कर लेते हैं या फिर उन्हें थोड़ा और कुचल देते हैं। ये परेशान आत्माएं दूसरों को कष्ट रूपी Missed Call देकर अपना बैलेंस बचाती हैं जबकि उनका नींद वाला बैलेंस कभी रिचार्ज नहीं होता। पूरे मानव इतिहास में सबसे बड़े नैतिक मूल्यों वाले देश में, निद्रा सुख का दावा एक ढोंग है। पिछले कुछ हफ़्तों में अपनी नींद से कुछ समय काटकर तीन कविताएं निकाली हैं। अब उन्हें इस प्रस्तावना के साथ संलग्न कर रहा हूं।

Old house… पुराना घर

वो अपने घर में ताला लगाकर चले गये
हमेशा के लिए
अब चाहे कहीं भी रहते हों
उनकी थकान कैसे उतरती होगी?
नींद तो आज भी उसी घर में
ताले के पीछे बंद है
वहाँ तरक़्क़ी नहीं थी
यहाँ नींद नहीं है

 

Paradise Towers… जागती हुई अट्टालिकाएं

अब घरों में वो नींद नहीं आती
जो होती है बिलकुल मौत जैसी
हर पल मन में आहट सी रहती है
दफ़्तर से पूरी तरह छूट नहीं पाते
और ना पहुँच पाते हैं घर पूरी तरह

फ़ोन की स्क्रीन की तरह
चौकन्ने होकर सोते हैं
और सुबह देर तक
आँख बंद करके जागते रहते हैं

 

2 Nights – 3 Days : होटल वाली नींद

नींद की पर्चियाँ कट रही हैं
पाँच सितारा होटलों के बिस्तरों पर
लेटते ही नींद आ जाती है
इस सुकून में सौदे की संभावनाएँ हैं
एक पूरा उद्योग नींद से ही फल फूल रहा है

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

3 Comments

  1. “एक पूरा उद्योग नींद से ही फल फूल रहा है” बेहतरीन! Next Level!

  2. खुशनसीब हैं वो लोग जिनके पास “तरक़्क़ी” और “नींद” दोनों होती है।

Comment