🌈 A Kavi on iPad creates 'Nirvana of Infotainment'

Myopic World : मोटा चश्मा लगाने वालों का संसार

क्या आपने कभी ये सोचा है कि जो लोग मोटा चश्मा लगाते हैं, उन्हें बिना चश्में के ये दुनिया कैसी दिखाई देती है ? कमज़ोर नज़र का अर्थ है रेखाओं का मिट जाना। दुनिया में हर चीज़ को आकार देने का काम रेखाएँ ही करती हैं, और नज़र कमज़ोर होते ही, सबसे पहले ये रेखाएँ ही अदृश्य हो जाती हैं। जैसे ही रेखाओं की ये सीमा ख़त्म होती है, सारी चीज़ें आपस में मिल जाती हैं। इंसान से लेकर इमारत तक, सबकी हैसियत एक जैसी लगती है। ऐसा लगता है कि कमज़ोर नज़र वाले कितना साफ़ देख पाते हैं, दायरों के पार देख पाते हैं।

उसकी नज़र कमज़ोर है,
चश्मा लगने वाला है शायद,
कुछ भी स्पष्ट नहीं

इंसान हो या इमारत किसी का कोई दायरा नहीं
अकड़ और अमीरी-ग़रीबी की सारी रेखाएँ
धुँधली, मिटी हुई, मिली हुई सी
दुख में मिला हुआ सुख
दिन में मिली हुई रात
चारों तरफ़ बुलबुलों से भरी हुई दुनिया
बड़े बड़ों की हैसियत कैसी?
साबुन के झाग जैसी

ये रंग बिरंगा शून्य है
कमज़ोर आंखों से वो सब कुछ दिख रहा है
जो स्वस्थ आंखों से भी दिखाई नहीं देता

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

Leave a Reply | दिल की बात लिखिए

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Basic HTML is allowed. Your email address will not be published.

Subscribe to this comment feed via RSS

%d bloggers like this: