सूरज की ओर बढ़ता हाथ मुट्ठी बंद करता है और अंधेरा छा जाता है।
क्या लिखा हैं।कामयाबी के आगे ,पा लेने के एहसास के बाद उजाला नहीं बचता तो फिर अन्देहर ही होता है।
रौशनी सम्पूर्ण नहीं है
रौशनी पीते पीते अंधेरा मांग लिया
अंधेरा विभेद नहीं करता
ग़ज़ब की अर्थभरी कविता है।

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