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Deep Dive : महत्वाकांक्षा और सपने के टकराव की चिंगारियाँ

Deep Dive क्या है ? एक गोताखोर की तरह किसी भी चीज़ (विषय-विवाद-भावना-पदार्थ) में गहराई तक उतरने की प्रवृत्ति। किसी भी चीज़ में चार-पाँच फुट से ज़्यादा गहरे उतरते ही सब कुछ नया हो जाता है। हम सब एक बार जन्म लेने के बाद भगवतकृपा से तो नये नहीं हो सकते, इसलिए गोताखोर बनना ज़रूरी है, फिर चाहे तैरना आता हो या नहीं।

ऑक्सीजन मास्क लगाए बग़ैर ही आगे पढ़ सकते हैं, गहरा है पर आपको घुटन नहीं होगी।

महत्वाकांक्षा अपनी तासीर से ही कितनी स्पष्ट और तीखी है, और सपना भाप जैसा धुँधला, कभी पकड़ में नहीं आता। महत्वाकांक्षा में सिर्फ इच्छा होती है और उसे पूरा करने की तलब होती है लेकिन सपने का दायरा बड़ा होता है। सपने के सिरे दिखाई नहीं देते.. सपना सिर पर फैले बादल जैसा होता है.. सपना मुट्ठी में नहीं समा सकता.. इसलिए कोई चाहे भी तो हवस से सपने को पूरा नहीं कर सकता।

हां, महत्वाकांक्षा पूरी हो सकती है। थोड़ी कोशिश और कशिश से! महत्वाकांक्षा पर नैतिक दायित्व भी नहीं होता और जिस पर कोई ज़िम्मेदारी न हो वो अनियंत्रित और ख़तरनाक हो जाता है। इसलिए महत्वाकांक्षा ख़तरनाक हो सकती है, पर सपना नहीं। महत्वाकांक्षा को मारा जा सकता है, सपने को नहीं। वैसे मारना चाहोगे भी तो भी, सपना मरेगा नहीं बस तुमसे छूट जाएगा और दुनिया के किसी और कोने में अपने लिए सुपात्र ढूंढ़ लेगा।

अगर इच्छा के पैरों में महत्वाकांक्षा की चप्पलें हों.. तो रास्ता थोड़ा आसान हो जाता है। बहुत सारा क़ीमती सामान इकट्ठा हो जाता है लेकिन इसके बाद भी, सपना पूरा करने के लिए कुछ और ही चाहिए होता है। इसे कुछ और ही इसलिए कह रहा हूं – क्योंकि सपने फैले हुए होते हैं.. उनके सिरे इतने साफ दिखाई नहीं देते।

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

2 Responses to “Deep Dive : महत्वाकांक्षा और सपने के टकराव की चिंगारियाँ”

  1. Rahul goel

    सही बात है सपने छूट जाया करते हैं लेकिन मरते नहीं है । बहुत सही लिखा है, थोड़ा और लंबा होता तो और गहराई में उतरने का मौका मिलता लेकिन इतना भी शानदार है ।

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  2. Rahul goel

    सही बात है सपने छूट जाया करते हैं लेकिन मरते नहीं है । बहुत सही लिखा है, थोड़ा और लंबा होता तो और गहराई में उतरने का मौका मिलता लेकिन इतना भी शानदार है । अति उत्तम

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