Mother (मां) : Lifeline of Our World

This is Video of Digital Sketch along with Original Music Composed on iPad Pro

Reference : A Poem titled ‘Tolerance’

मां ने हमें सहना सिखाया,
तंगहाली में रहना सिखाया

जब ज़माने ने मारी ठोकरें
कपड़े झाड़कर बढ़ना सिखाया

ऊंचाई पर खड़े हुक्मरानों से
कर्री बात कहना सिखाया

जीतकर रोने वाली भीड़ में
हारकर नाचना, हँसना सिखाया

 

 

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

5 Replies to “Mother (मां) : Lifeline of Our World”

  1. जीत के हंसने वालों के बीच
    हार के हंसना सिखाया

  2. मुझे मेरी माँ ने अन्न का आदर करना सिखाया है, वो बोलती है खाने को देखकर मुह मत बनाओ, जो बना है या मिला है,प्यार से खाओ। कपड़ो को अवेर के रखो, घर को साफ़ और सजा के रखो। सारे धर्म का आदर करो। और भी न जाने कितनी अच्छी और प्यारी बातें माँ ने सीखाई हैं। वो मुझे घर के हर एक काम में perfect बनाना चाहती है, वो मुझे इसलिये डांटती है ताकि ससुराल में मुझे डाट न खानी पड़े। सच में माँ बहुत प्यारी होती है!

  3. सर जब पहली बार आपकी की poerty website को check किया (देखा) था , तो सब से पहले यही वाली (माँ)👆digittal painting देखी थी। बहुत ज्यादा पसंद आई थी। उस वक़्त भी निशब्द थी और आज भी।

  4. Trina I second that…. Artist are few and precious

  5. I showed the painting and poem to my mother sir…she said that people with a bhavuk and beautiful heart like you are not many in the world …god bless you sir…

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