Fist of Darkness : मुठ्ठी में अंधेरा

एक हाथ ऊपर उठता है
सूरज की तरफ बढ़ता है
उस तक पहुंच जाता है
उसे मुट्ठी में बंद कर लेता है
लेकिन मुठ्ठी बंद होते ही… अंधेरा हो जाता है

Poem & Digital Painting ~ © Siddharth Tripathi ✍ SidTree

4 Replies to “Fist of Darkness : मुठ्ठी में अंधेरा”

  1. उपलब्धि को कामयाबी समझने वालों के दिमाग की मरम्मत करने वाली कविता है।जो लोग जीवन मे हर सफलता को चुनौती की तरह की तरह लेते हैं उन्हें इससे सीख मिलेगी,कि आप अगर सूरज को भी अपनी मुट्ठी में बंद के लें तो उसका अंजाम अंधेरे की तरह ही होगा।क्योंकि चुनती खत्म होते ही सफलता दो कौड़ी की चीज हो जाती है उनके लिए जो कामयाबी को महत्व देते है प्रयासों को नही।

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