The ‘Change Energy’ of Keyboards : बदलाव की बिजली बनाने वाले की-बोर्ड

Copyrighted Image/Sketch, Credit : Siddharth Tripathi

In background of Every Live Video
Every Public Act
Or War of Personalities
There are Sketches
Black and white spaces
Mind Lines of endless possibilities
Intermittent Taps on keyboards
Trajectories of Lips with fake smiles
Holding a House of cards on stage.

Behind Claps & Cheers & Trends & Perfect Moments
There are Musings of Tired Eyes and Souls
Holding flood of chaos like a Dam.

Around Us..
There are keyboards,
powerful enough
to generate Electricity of Change!

 

ये कविता मूलत: अंग्रेज़ी में लिखी गई थी।
मैंने बाद में इसे हिंदी में नये सिरे से लिखा है।

 

कीबोर्ड पर रुक रुककर गिरती उँगलियों की ऊर्जा
व्यर्थ नहीं जाती…
वो बिजली में बदल जाती है

टीवी पर दिखाई जाने वाली हर बहस
और व्यक्तित्वों के शाब्दिक युद्ध में
जब जब ईंधन की ज़रूरत होती है
तो ये की-बोर्ड किसी जेनरेटर की तरह चालू हो जाते हैं
कई रातों की जगी हुई आँखें और फ़टी क़मीज़ जैसी ईमानदारी,
हर नाज़ुक मोड़ पर ईंधन का काम करती है।
इस बिजली का कोई चेहरा नहीं होता
ये चुपचाप दुनिया को रौशन करती रहती है
दुनिया में जहाँ भी की-बोर्ड मौजूद हैं
वहां उँगलियों से ये विद्युत
धारा प्रवाह बह रही है

© Siddharth Tripathi ✍ SidTree

3 Comments

  1. सर, आपके शब्द हकीक़त के बेहद करीब होते हैं, जिसे जो समझ गया वो ज़िन्दगी के असल मायने जी गया🙏🏼🙏🏼🙏🏼

  2. वो उर्जा जो ना कभी बर्बाद नही होती है ना नष्ट
    सिर्फ बदलती है एक की बोर्ड से दुसरे की बोर्ड पर

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