निरुत्तर, मेरे पास शब्द नहीं है बयान करने के लिए। अद्भुत, बढ़िया जैसे शब्द बहुत छोटे हैं इन भावों के आगे।
तुम्हारी क़लम चलती रहे ।। यों ही भावनाओं की सियाही उकेरते रहो।।

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