आज तुममें कुछ नया है : Subscription Renewed

Arizona की एक फ़ोटोग्राफ़र हैं Eunice Stahl, उनकी तस्वीर का Composition मेरी इस कविता को कहीं छूता है, इसलिए मैंने इसे पेंट करने का फैसला किया। पानी के रंग और बादलों पर बहुत देर तक अंगुलियाँ घुमाई हैं, कविता पढ़ने के बाद इसे एक बार फिर देखिए

 

भेस बदलकर आया करो हर रोज़
अनजान लोगों से मिलना
अच्छा लगता है

कच्ची मिट्टी बनकर घूमा करो
मेरे चाक पर
हाथ से ढालना तुम्हें
सच्चा लगता है

हर बार नया होकर
फिर पुराना हो जाना
नित अंदर दौड़ता कोई
बच्चा लगता है

Original Beautiful Image and Painted versions. World is a Small place, We are all so connected.

Photo Credit : Eunice Stahl

 

© Siddharth Tripathi ✍️SidTree

2 Comments

  1. कविता चलती चाक की तरह लगी इसने दिमाग मे मौजूद भावनाओ की kachhi मिट्टी को एक रूप स दे दिया।

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