ट्रंप तुम सभ्य तो हुए नहीं !

ट्रंप तुम सभ्य तो हुए नहीं,
धरती पर बसना भी तुम्हें नहीं आया
एक बात पूछूँ — उत्तर दोगे ?
प्रकृति को लूटना कहां से सीखा
विषैला धुआं कहां से पाया

अज्ञेय की कविता साँप का पर्यावरणीय संस्करण मैंने लिखा है, आज ट्रंप पर कटाक्ष करने के लिए, इस नुकीली कविता का इस्तेमाल करने की इच्छा हुई 

(मूल कविता इस प्रकार है)

साँप !
तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना
भी तुम्हें नहीं आया।
एक बात पूछूँ–(उत्तर दोगे?)
तब कैसे सीखा डँसना–
विष कहाँ पाया?

(जून 1954, दिल्ली)

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