Climate Deal : महाशक्तियों को पूरी साँस नहीं मिलेगी

This is a special one for International Mother Earth Day

पुरानी साँसें बहुत जल्द मैली हो जाएंगी
इतनी मैली कि कार्बन जमने लगेगा सोच-समझ पर
इसलिए सभ्य व्यापारियों को नई साँसों की तलाश है
पलायन की तैयारी में लगे हैं सभी विकास-पुरुष
परंतु पलायन हो न सकेगा
धरती पर खिंची हुई सीमा रेखाएँ
हवा को न बाँट सकेंगी
श्वास नली में अटक जाएँगे
विकास के अवशेष, और…
विश्व की महाशक्तियों को पूरी साँस भी न मिलेगी

इसलिए सभ्य व्यापारियों को नई साँसों की तलाश है
पलायन की तैयारी में लगे हैं सभी विकास-पुरुष

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

6 Replies to “Climate Deal : महाशक्तियों को पूरी साँस नहीं मिलेगी”

  1. बहुत सही लिखा है सर! Excellent!

  2. कड़वा और सत्य! It should in English Version also so that विश्व की महाशक्तियां (अमरीका,ट्रंप) could read this.
    और “विकास पुरुष” विकास के लिये प्रदूषण को नज़र-अंदाज़ करते हैं और फिर पलायन चाहते है, ये कैसे संभव है सर हा हा! “विकास-पुरुष” की समझदारी का परिचय, पहले विकास फिर पलायन! “परंतु पलायन न हो सकेगा”।

  3. Aptly and beautifully expressed… Think about a book 🙂

  4. साँसों में अटके विकास के अवशेष
    बहुत शानदार

  5. True… तथाकथित विकास के एवज़ में साँसों का सौदा..

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