⏳Sand Waves of Time : रेत की स्लेट

Life always gives you plain sheet of paper, write something new !

वक़्त निकालते हैं
रेत पर हसीन सा दिन
गुलाबी सी शाम जोड़ते हैं

लम्हों को
नर्म अंगुलियों से लिखते
धुआं हो जाता है वक़्त
निकलता जाता है हाथ से

फिर
गुज़रते हुए वक़्त के
एक सिरे पर
सवार लहर
जीने का साज़ो सामान
चुरा ले जाती है

कोरी हो जाती है
रेत की स्लेट
फिर से कुछ नया लिखने के लिए


© Siddharth Tripathi  ✍️SidTree
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2 Replies to “⏳Sand Waves of Time : रेत की स्लेट”

  1. Simple & Sweet poem! Beautiful words siddharth sir!👌

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