ThunderClaps in a Mirror House : शीशमहल में गूंजती तालियां

This Poem is Unique in its Structure. It is written in 2 different parts one is Sound and other is Echo. Sound carries a thought and Echo Amplifies the Meaning as a whole.

ध्वनि / Sound

कुछ लोगों में चाह है सब कुछ हो जाने की
सब कुछ पा लेने की
सब कुछ बन जाने की
राजा से लेकर मज़दूर तक
विचारक से लेकर विद्रोही तक
हर भूमिका को अपने चेहरे पर चिपका लेने की ये हवस
ख़तरनाक है

प्रतिध्वनि / Echo

आईनों के घर में खड़ा इंसान देखता और सुनता है
अपनी ही तालियाँ, अपना ही अट्टहास, असंख्य बार
हर वक़्त आंखों के सामने दिखती है भीड़
पर होती नहीं है
ये लोकप्रियता, ये चमक
अंदर ही अंदर कितनी बुझी हुई है
कितनी उदास है
कितनी अकेली है
और कितनी डरी हुई है


© Siddharth Tripathi  *SidTree
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One Reply to “ThunderClaps in a Mirror House : शीशमहल में गूंजती तालियां”

  1. आप 1 ऐसे बेहतरीन कवि है जो भावनाऐं बयां करने के साथ अलग अलग Theme पर भी/को समझाने के लिए भी कविता लिखते है!दिल की आवाज़ को शब्दों में गढ़ते है!आपके काव्य की 1 अलग पहचान है! Love it!

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