Cold Cold Sun : ठंडा सूरज

Core Thought : Light and Dark, 
Two shores of a river called Time. 
You are flowing, 
Touching the light intermittently
 and swimming into darkness sometimes, which dissolves and levels everything. This is story of a streak of light which loses the strength and dives into cold cold Sun, Only To fight with evil magnetism of black hole.


रोशनी फर्क करती है
अंधेरा फर्क नहीं करता
अंधेरा हर चीज़ को बराबर कर देता है
उसका गहरा काला रंग
हर व्यक्ति और वस्तु की
मौजूदगी को मिटा देता है
सब कुछ समतल हो जाता है
अंधेरे का हर हिस्सा एक जैसा होता
दूरियां अपने मायने खो देती हैं
अंधेरे के साम्राज्य में इतनी समानता है
फिर भी
कैनवास अंधेरे का
ज़िंदगी की दीयासलाई
हम सबने मिलकर रोज़ आग लगाई
बार बार लगाई
क्योंकि
सूरज को ठंडा होते हुए,
ब्लैक होल बनते हुए,
हम नहीं देख सकते
रोशनी को क़ैद होते हुए
हम नहीं देख सकते


© Siddharth Tripathi  *SidTree
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3 Replies to “Cold Cold Sun : ठंडा सूरज”

  1. सूरज को ठंडा होते हुए……………..हम नहीं देख सकते। love these lines Sir. 👌 And these lines are showing the brightness of the beautiful poem.

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