Fuel – मेरे अपने

How the love from our near & dear ones, becomes the fuel for us to survive in Mega Cities. Even the long distance relationships re-fuel you to fight all alone. You are not self made, you are love made.

मेरे ताऊजी राम किशोर तिवारी को अंतिम प्रणाम के साथ


एक लंबी जीवनयात्रा की थकान
जो हड्डियाँ पकड़कर लटकी हुई थी
वो अस्थियाँ बनकर लेट गई

जो अपना होता है, वो आदत बन जाता है
उसे देखने की,
देखते रहने की आदत हो जाती है
मीलों दूर मौजूद होने पर भी
उसका एक अदृश्य आवरण रहता है आसपास
संचार के असंख्य साधन हैं
फिर भी कभी बात नहीं होती
बस धुँधला सा एहसास बना रहता है

महानगरों में ग़ैरो के महासागर में
पीने लायक एक बूंद की तलाश हमेशा रहती है
और इस तलाश का ईंधन बन जाते हैं
मेरे अपने


© Siddharth Tripathi  *SidTree
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