Lantern : लालटेन | A Poem with Two Halves

This Poem Uses Lantern as a Habitat of fire
and then measures the Intensity, Moods, Characteristics, Transitions and Sorrows of Fire. Imagine this as a Fire inside all of us and then feel the essence of this Poem.

 

Fire Tamed in a Lantern

बिजली का इंतज़ार करने वाले गाँवों में आज भी
जब शाम को सूरज डूबता है
तो एक लालटेन सूली पर लटकाई जाती है
बहुत सारी मजबूरियाँ
पूरी रात जलती हैं उस लालटेन में
आग अगर पालतू हो जाए
तो घर रौशन रहता है

 

Tired Fire, sitting under a Street light

पूरी अय्याशी से बिजली के पेग लगाने वाले शहरों में
लालटेन सिर्फ़ सजावट का सामान है
ख़ाली लालटेन देखते ही लगता है
जैसे रोशनी ने किराये का घर ख़ाली कर दिया हो
और थककर
किसी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठ गई हो

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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