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Cost of Brain Power : बैठकर कुर्सी तोड़ना भी थकाने वाला काम है

 

brain-illustration

अक्सर ये समझा जाता है कि बैठकर दिमागी काम करने से कम ऊर्जा खर्च होती है। इस आधार पर शारीरिक श्रम को, मानसिक श्रम के मुकाबले ज़्यादा मेहनत वाला काम माना जाता है.. लेकिन ऐसा है नहीं। थोड़ा रिसर्च करते हुए और एक किताब के पन्ने पलटते हुए ये बात थोड़ी और साफ हुई कि मानसिक श्रम हमारे शरीर से बहुत सारी ऊर्जा खींच लेता है। इसलिए मन-मस्तिष्क का इस्तेमाल सही कार्य में, सोच समझकर करना चाहिए। दिमाग की ताकत व्यर्थ करने के लिए नहीं है। दिमाग़ का इस्तेमाल करने में ( बैठकर कुर्सी तोड़ने में ) भी मेहनत लगती है।

नीचे यूवल नोआ हैररी की किताब सेपियन्स का छोटा सा अंश है जो मेरी बात को और पुष्ट करता है

“In Homo sapiens, the brain accounts for about 2–3 per cent of total body weight, but it consumes 25 per cent of the body’s energy when the body is at rest. By comparison, the brains of other apes require only 8 per cent of rest-time energy. Archaic humans paid for their large brains in two ways. Firstly, they spent more time in search of food. Secondly, their muscles atrophied. Like a government diverting money from defence to education, humans diverted energy from biceps to neurons. It’s hardly a foregone conclusion that this is a good strategy for survival on the savannah.”

Excerpt From: Yuval Noah Harari. “Sapiens: A Brief History of Humankind.”

एक और रिसर्च ये बताता है कि छोटे से दिमाग को शरीर का एक चौथाई ग्लूकोज़ चाहिए होता है !

According to the American College of Neuropsychopharmacology. The modern brain is Power Hungry. It accounts for about 2 percent of body weight, but it uses about 20 percent of the oxygen in our blood and 25 percent of the glucose (sugars) circulating in our bloodstream.

कई काम एक साथ करने की क्षमता पर छोटी सी जानकारी

A 2005 study found that the parts of the brain responsible for multitasking don’t fully mature until we’re 16 or 17 years old.

शायद इसीलिए, नौकरी से लेकर शादी तक.. सब इस उम्र के बाद ही होता है..

Sapiens एक अच्छी किताब है.. अगर समय मिले तो आपको ज़रूर पढ़नी चाहिए।

ज्ञान by SidTree का मतलब है सिद्धार्थ द्वारा वृक्ष के नीचे बैठकर दिया गया ज्ञान, यहाँ मैं बुद्ध होने का दावा नहीं करता, वो तो ईश्वर समान हैं, लेकिन मैं जानकारियों को दृष्टिकोण देते हुए ज्ञान का प्रकाश फैलाने की पूरी कोशिश करूँगा


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