Vaccum : मन में भीड़ है.. घर खाली है

Core Thought / मूल विचार : कई बार हमारे घर, अंतरिक्ष के निर्वात की तरह प्रतीत होते हैं, हमारे आसपास की दुनिया एकदम खाली लगती है जिसमें हवा की भी जगह नहीं होती.. जबकि मन में हमेशा लोगों की और विचारों की भीड़ लगी रहती है। मन में कतारें लगी हैं और घर, आगंतुक की आहट को तरस रहा है.. सही मायने में यही जीवन का Vaccum यानी निर्वात है।


आसमान में बादल टकराए
लाइट चली गई
हमने जल्दी से अंधेरा ओढ़ लिया था
मगर कुछ सवाल फिर भी भिगो रहे थे

माहौल में इतनी नमी है
तो इंसानों में क्यों नहीं ?

बे मोहब्बत जिस्म
कहाँ जाते होंगे?

अकेली रूहें
क्या कहीं बैठकर
सिगरेट पीती होंगी ?

पर्दे हिल रहे थे
पियानो बज रहा था
तभी बग़ल में बैठा कुत्ता
भौंकने लगा
पैर चाटने लगा
लाइट आ गई

इसी के साथ
ये एहसास भी आ गया
कि घर में कोई नहीं है

मन में कितना कुछ है
घर में कोई नहीं है


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

* Kavi on iPad = Poet on iPad : It is an Internet Project to forge Arts with Technology and showcase Poetry in Digital millennium

Siddharth Tripathi / *SidTree
3
  1. Lavannya (@lavannyadhekane)

    Superb Poem.poem is full of emotions & feeling.Very Superbly Express Pent up Emotions & Relations.कविता हमारे लिऐ और भी Heart Touching होती अगर आप इसे अपनी आवाज में सुनाते.

    Like

    Reply
  2. Sarina(@SarinaEkka)

    वाह सर ! बहुत खूब! Very Nice! काश में भी आप की तरह लिख पाती। So many things in my mind but उनेह पन्नों पर नहीं उतार पाती! I always feel Awesome & glad to read your poem! Thankuuuu Sir..!!

    Like

    Reply

Leave a Reply | दिल की बात लिखिए

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s