Diwali | इस बार दीवाली गीली नहीं है

Happy Diwali to all of you. I wrote this poem in 2015 and even today I feel like sharing it. This Hindi Poem Sketches essence of the festival of Diwali.


दीयों की आंच मेंimg_0252-2
सपने सूख रहे हैं
वो रात, वो ख़्वाहिशें
अब सीली नहीं हैं
इस बार दीवाली
गीली नहीं है

देखो भाप बनकर
कैसे उड़ता है ग़म
फुलझड़ी से चेहरे
हंसी जैसे बम
मन भी मीठा है
लक्ष्मी यहीं है
इस बार दीवाली गीली नहीं है


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

* Kavi on iPad = Poet on iPad : It is an Internet Project to forge Arts with Technology and showcase Poetry in Digital millennium

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