Jealousy : मन में भी श्मशान होता है

Core Thought : Jealousy is like a cemetery in your mind. This poem is a sketch of basic human tendencies.


कई बार चिठ्ठियां त्वचा में छेद कर देती हैं
और मन के अंदर बहने वाले द्रव बाहर निकलने लगते हैं
वैसे आजकल चिठ्ठियों का नहीं फेसबुक का ज़माना है
लोग चिठ्ठियां काग़ज़ पर नहीं लिखते
कहानियां, संस्मरण, तस्वीरें, चिपचिपी बातें
चमचागीरी, अभिमान की मालिश, यारियां, दुश्वारियां
सब कुछ सोशल नेटवर्क की हवा में लिखा जाता है
और इंसान की ये तमाम तहरीरें
करोड़ों लोगों द्वारा पढ़ी जाती हैं, हर रोज़
अपने अंदर लगे मकड़ी के जाले को साफ करने की
नाकाम कोशिश के साथ
सब किसी दूसरे को देख रहे हैं
किसी और के उत्सव को देखते और पढ़ते हुए
लोगों के अंदर का श्मशान सुलगने लगता है


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

1 Comment

  1. क्या भाव और त्रस्ना का सैलाब बिखेरा है आपने वाह
    भाई
    जारी रखिए इसी तरह

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