Ringtone 🔔 रिंगटोन

Hi, Kavi-Vaar is published, this one is connected to your ringtone 🔔. Say hello to this cyclic poem, it starts and ends on same point, the ending explains the start and vice versa. Read this and tell me how you feel.


बजने लगी रिंगटोन
पूछने लगी तू कौन
लोगों की इस भीड़ में
सारा जग क्यों है मौन

जेब से निकालकर फोन
देखते है.. अपना कौन, पराया कौन
कोई है.. कहां है.. मैं कौन, तू कौन

रक्त उछलकर नाचने लगता है
जब आता है किसी का फोन
यूं ही, बिना किसी काम के

आदेश, मिन्नतें, सौदे, संदेसे
हर बार बजते हैं
लेकिन अक्सर नहीं बजती रिंगटोन


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

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