Flyover : फ्लाईओवर

Hi, Kavi-Vaar is published, this time it started while I was driving my car & passing through a flyover. Please read and tell me what you feel.

Flyover, a poem by SidTree
This picture is the exact point where this poem originated

फ्लाईओवर पर चढ़ते हुए
हमें लगता है कि बादल बहुत करीब है
और हमारी कार
सड़क पर चलते चलते सीधे बादल में घुस जाएगी
लेकिन सबसे ऊंचे बिंदु पर पहुंचने से पहले ही
बादल और ऊंचा हो जाता है
यही धरती और आकाश का फासला है
यही यथार्थ और स्वप्न का फासला है
और ये फासला पूरा होने से ज़रा सा पहले
ढलान शुरू हो जाती है
और शुरू हो जाता है
अगली चढ़ाई का इंतज़ार


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

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