Balloons : ग़ुब्बारे थे छोड़ दिए

Hi, Kavi-Vaar is here, this time its on Balloons and I’ve tried to use them as a tool to express myriad of poetic impressions. There is also a Azaadi (Independence) Message in this. Please read and tell me what you feel.

 

उन्हें हाथ छुड़ाना था
उन्हें ऊपर जाना था
उन्हें पूरी दुनिया को
अपना रंग दिखाना था

ऊंचाई पर गए
दबाव में फटे
और हवा में मिल गये
जैसे कभी थे ही नहीं

गुब्बारे थे छोड़ दिए

© Siddharth Tripathi ✍️ SidTree

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