फ़ासला : Distance

Core Thought : Just feel the distance, sometimes distance is equivalent to worship.

मूल-विचार : इस बार कविवार में दूरी यानी फासले को महसूस कीजिए, कई बार ये फासला ही एक तरह की पूजा होता है


 

मेरे अंदर खड़ी
संकोच की दीवार को गिराने के लिए
कुछ करना होगा
वर्ना तुम्हें
बुत बनना होगा

हम दोनों
एक देवालय की दो दीवारों पर
अलग अलग स्थापित हो जाएँगे
सिंदूर में नहाए
एक दूसरे को देखते
मंत्रों को सोखते
मैं और तुम
और हमारे बीच से गुज़रता
इंसानों का महासमुद्र
यूँ अनंत काल तक
एक दूसरे को देखते रहना
एक कभी न ख़त्म होने वाली पूजा है


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

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