Love Stream 8 : घूंट भर चैन | Sip some Love

Now sip some love in form of tea! In this poem I’ve used tea as a medium to dissolve Love in a relationship. One of my very old poems.

घूंट घूंट ज़िंदगी है
चाय की चुस्कियों के बीच
क्लास
सफ़हे कामयाबी के
कुछ नए रिश्ते
निवाले गुड़खानी के
दिन की शुरुआत घूंट से
तो थक के डोलती शाम को
सहलाते दो गर्म घूंट
आज अदरक डाली है
होंठ लगाए हैं
ज़ायका संभाल लेना
दो घूंट चाय कहो
या चैन
भेजा है तुम्हारे नाम


© Siddharth Tripathi  *SidTree |  www.KavioniPad.com, 2016.

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